एक शेयर का अंकित मूल्य, सम मूल्य के रूप में भी जाना जाने वाला, वह मूल्य है जिस पर एक शेयर शेयर बाजार में सूचीबद्ध हुआ

एक शेयर बाजार एक ऐसा स्थान है जो निवेशकों को अच्छे लाभ कमाने की क्षमता देता है। बाजारों में निवेश करते समय, शेयर बाजार की शर्तों का ज्ञान आवश्यक है। समझने वाली पहली बात शेयर का अंकित मूल्य है। इसे सम मूल्य के रूप में भी जाना जाता है और जब शेयर जारी होता है तब निश्चित होता है। अंकित मूल्य की एक आवश्यक विशेषता यह है कि यह निश्चित है, और यह कभी नहीं बदलता।

अब, हमने शेयर के अंकित मूल्य के अर्थ को देखा, हम देखेंगे कि यह कैसे निर्धारित किया जाता है। इसकी गणना नहीं की जाती है बल्कि इसके बजाय मनमाने ढंग से नियत किया जाता है। अंकित मूल्य का उपयोग कंपनी के बैलेंस शीट के लिए कंपनी के शेयर के लेखांकन मूल्य की गणना करने के लिए किया जाता है। इसलिए, यह याद रखना जरूरी है कि अंकित मूल्य का प्रचलित शेयर मूल्य से कोई संबंध नहीं है।

शेयर बाजार में अंकित मूल्य का महत्व कानूनी और लेखांकन कारणों के लिए है। पहले, जब एक शेयरधारक ने शेयर खरीदता था, तो उसे एक शेयर प्रमाणपत्र जारी किया जाता था जिसमें अंकित मूल्य शामिल था। आजकल, हालांकि, सभी प्रमाणपत्र डिजिटल प्रारूप में जारी किए जाते हैं। ज्यादातर भारतीय कंपनी के शेयरों का अंकित मूल्य 10 रुपये का होता है।

अंकित मूल्य और बाजार मूल्य के बीच अंतर: कई पहली बार निवेशक शेयर के अंकित मूल्य और इसके बाजार मूल्य के बीच अंतर से भ्रमित हो सकते हैं। बाजार मूल्य वर्तमान मूल्य है जिस पर पूंजी बाजारों में एक शेयर बेचा या खरीदा जाता है। ज्यादातर एक शेयर का अंकित मूल्य बाजार मूल्य से कम होती है। किसी कंपनी का बाजार मूल्य इसके प्रदर्शन और मांग और उसके शेयर की आपूर्ति के आधार पर बदलता है। चलिए हम मन लेते हैं कि एक कंपनी 10 रुपये के अंकित मूल्य पर सार्वजनिक होती है। इसका बाजार मूल्य 50 रुपये हो सकता है। हालांकि, यह हमेशा का मामला नहीं है। कुछ शेयरों के मामले में, अंकित मूल्य बाजार मूल्य से अधिक हो सकता है।

एक शेयर को प्रीमियम या सम के ऊपर कहा जाता है जब इसका बाजार मूल्य उपरोक्त उदाहरण की तरह इसके अंकित मूल्य से अधिक होता है। यदि 10 रुपये के अंकित मूल्य वाला शेयर 25 रुपये पर बिक रहा है, तो यह 15 रुपये के प्रीमियम पर है। बाजार मूल्य अंकित मूल्य के बराबर होने पर यह सम माना जाता है। यदि बाजार मूल्य अंकित मूल्य से कम है, तो यह छूट पर या सम से नीचे बिक रहा है। उदाहरण के लिए, यदि 100 रुपये के अंकित मूल्य वाला शेयर 50 रुपये पर बिक रहा है, तो यह 50 रुपये की छूट पर है।

लाभांश की गणना में अंकित मूल्य का महत्व: जब कोई कंपनी अपने शेयरधारकों के बीच अपने वार्षिक मुनाफे का एक हिस्सा वितरित करती है, तो इसे लाभांश के रूप में जाना जाता है। किसी शेयर का अंकित मूल्य लाभांश की गणना में महत्व रखता है। यही कारण है कि एक निवेशक के रूप में लाभांश की गणना करने के लिए शेयर के अंकित मूल्य को देखना महत्वपूर्ण है।

आइए हम एक उदाहरण के साथ समझें। हम मानते हैं कि एक शेयर बाजार में 100 रुपये पर कारोबार कर रहा है, लेकिन 10 का अंकित मूल्य है। जब यह 10 प्रतिशत के लाभांश की घोषणा करता है, तो 1 रुपये लाभांश होता है, न कि 10 रुपये।

शेयर विभाजन के मामले में अंकित मूल्य: जब कोई कंपनी अपने शेयर को विभाजित करने का निर्णय लेती है, तो यह अंकित मूल्य पर आधारित होता है। यह भी समझना आवश्यक है कि शेयर विभाजन के मामले में एक शेयर का अंकित मूल्य का क्या होता है। शेयर विभाजन अंकित मूल्य के विभाजन के अलावा कुछ भी नहीं है, इसलिए 1:5 विभाजन के मामले में, जिन शेयरों में 10 रुपये का अंकित मूल्य था, उन्हें 2 रुपये के अंकित मूल्य में बदल दिया जाएगा। हालांकि, शेयरों की कीमत भी आनुपातिक रूप से गिर जाएगी। जबकि, आपके स्वामित्व की कुल राशि वही रहेगी। असल में, निवेशकों के लिए अधिक शेयर उपलब्ध होंगे।

जब शेयर बाजारों में निवेश करते हैं तो शेयर के अंकित मूल्य के अर्थ को समझना और यह बाजार मूल्य से अलग कैसे है, यह समझना महत्वपूर्ण है।