मूविंग एवरेज एक महत्वपूर्ण संकेतक है जो व्यापारियों द्वारा यह समझने के लिए उपयोग किया जाता है कि बाजार किस तरह से आगे बढ़ रहा है। यह एक साधारण उपकरण है जो विभिन्न डेटा बिंदुओं की तुलना करता है, जिसकी पूर्ण डेटा सेट के विभिन्न सबसेट के माध्यों की श्रृंखला के आधार पर गणना की जाती है। यह उपयोगकर्ता को एक विचार प्राप्त करने की अनुमति देता है कि कीमत किस तरह से बढ़ रही है। जब यह आपको मार्केट मूवमेंट की उचित समझ पाने में मदद करता है, तो आपको इस परिवर्तन के परिमाण को समझने के लिए और अधिक उन्नत तकनीकों की आवश्यकता होती है। इसलिए, एमएसीडी या मूविंग एवरेज कन्वर्जन्स डाइवर्जन्स एक मोमेन्टम ऑसिलेटर है जो अक्सर मार्केट के उलटने की पहचान करने के लिए अन्य संकेतकों के साथ प्रयोग किया जाता है।

एमएसीडी कैसे मापा जाता है?

एमएसीडी एक मूविंग ऑसिलेटर है। लेकिन, अन्य ऑसिलेटर के विपरीत, इसका यह पता लगाने के लिए उपयोग नहीं किया जाता है कि कब शेयरों की अधिक खरीद एवं बिक्री होती है। इसके बजाय, इसका उपयोग मार्केट में बदलते ट्रेंड को समझने के लिए किया जाता है। एक एमएसीडी चार्ट तीन नंबरों से बना होता हैं। उनमे से दो लाइन ग्राफ हैं, जो क्रमशः तेज़ मूविंग एवरेज और धीमे-मूविंग एवरेज का चित्रण करती हैं और, एक तीसरा बार ग्राफ है जो कि दो मूविंग एवरेज लाइनों के बीच अन्तर की गणना करता है। 

उपरोक्त रेखा एक तेज़ मूविंग एवरेज को दिखाती है। और, नीली रेखा धीमे-मूविंग एवरेज को दिखाती है। हरे रंग की पट्टी दो पंक्तियों के बीच के अंतर को दर्शाती है। यह एक ट्रेंड फॉलोइंग मोमेन्टम ऑसिलेटर है जो कि सुरक्षा मूल्यों के दो मूविंग एवरेज के बीच एक सम्बंध को दर्शाता है।

एमएसीडी की गणना एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज या 12-दिवसीय एवरेज से 26-दिवसीय मूविंग एवरेज को घटाकर की जाती है। सूत्र नीचे दिया गया है।

एमएसीडी = 12-ईएमए अवधि- 26-ईएमए अवधि

(दीर्घकालिक ईएमए – अल्पकालिक ईएमए)

ईएमए का अर्थ है एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज। यह हाल के डेटा को अधिक महत्व देता है, और इसलिए यह अधिक सटीक होता है। एमएसीडी के नौ दिवसीय ईएमए को “सिग्नल लाइन’ कहा जाता है, क्योंकि खरीद एवं बिक्री के फैसले इस पर आधारित होते हैं। सिग्नल लाइन के ऊपर एमएसीडी खरीद को इंगित करता है, और इसी तरह, जब एमएसीडी सिग्नल लाइन के नीचे से गुजरती है, तो इसका मतलब बिक्री से होता है।

एक एमएसीडी चार्ट का अध्ययन कैसे करें। 

नीली रेखा 12- दिवसीय ईएमए और लाल रेखा 26-दिवसीय ईएमए का प्रतिनिधित्व करती है। जब नीली रेखा लाल रेखा से ऊपर होती है तो एमएसीडी का एक सकारात्मक मान होता है और इसका एक नकारात्मक मान भी होता है जब यह इसके विपरीत होती है। एमएसीडी और बेसलाइन के बीच की दूरी ईएमए लाइनों के बीच बढ़ती और घटती दूरी को दर्शाती है।

एमएसीडी लाइनों को अक्सर हिस्टोग्राम के ऊपर चित्रित किया जाता है। यह एमएसीडी लाइन और सिग्नल लाइन के बीच की दूरी को दर्शाता है, जैसा कि नीचे चित्र में दिखाया गया है।  बाजार में तेजी और मंदी के संकेतों की पहचान करने के लिए व्यापारी हिस्टोग्राम चार्ट का उपयोग करते हैं।

एमएसीडी संकेतक अन्य मोमेन्टम ऑसिलेटर संकेतकों से थोड़ा अलग है। आरएसआई या रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडिकेटर, जो एक और व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाने वाला ऑसिलेटर संकेतक है, यह दिखाता है कि कब किस शेयर की अधिक खरीद एवं बिक्री की गई। जबकि एमएसीडी दो ईएमए के बीच अंतर को इंगित करने पर ध्यान केंद्रित करता है, आरएसआई वर्तमान मूल्य के उच्च और निम्न स्तर से संबंधित मूल्यों के उतार-चढ़ाव को मापता है।  व्यापारी अक्सर ट्रेंड मूवमेंट पर अपने विश्लेषण को आधार बनाने के लिए दो संकेतकों का एक साथ उपयोग करते हैं।

एमएसीडी का उपयोग करने की सीमाएं

कभी कभी एमएसीडी और आरएसआई से प्राप्त परिणाम एक दूसरे  का विरोध कर सकते हैं। साथ ही, एमएसीडी तब भी एक  ट्रेंड के उल्टे होने का संकेत दे सकता है जब वास्तव में कोई उलटफेर नही होता है। ये झूठी सकारात्मक या नकारात्मक स्थितियाँ पैदा करते हैं।  व्यापारियों को वास्तविक मार्केट के उतार चढ़ाव को समझने के लिए दो या अधिक संकेतकों के बीच मेल को देखने की जरूरत है।

निष्कर्ष 

एमएसीडी एक ट्रेंड के उल्टे होने का संकेत देता है। जब एमएसीडी लाइन सिग्नल लाइन से ऊपर स्थित होती है, तो यह एक तेज ट्रेंड  दिखाती है। इसके विपरीत, जब यह सिग्नल लाइन से नीचे आता है, तो बाजार मे मंदी मानी जाती है। लेकिन यह बहुत सारे उलटफेर पैदा कर सकता है जो वास्तविकता में नहीं होते हैं। ये  ट्रेंड के उल्टे होने के संकेत और अधिक विश्वसनीय होते हैं जब वे चल रहे ट्रेंड के अनुरूप होते हैं। इसलिए, किसी को एमएसीडी के परिणामों के आधार पर अपनी रणनीति नहीं बनानी चाहिए; लेकिन अन्य संकेतकों के साथ इसका पालन अवश्य करें।