आयकर, प्रत्यक्ष कर का एक रूप है जो दुनिया में लगभग सभी सरकारों द्वारा किसी व्यक्ति की आय पर लगाया जाता है। हालाँकि, आप केवल तभी आयकर का भुगतान करने के लिए बाध्य हैं जब आपकी आय एक न्यूनतम सीमा तक पहुँच जाती है। आपकी आय जितनी अधिक होगी उतनी ही अधिक कर की कटौती होगी।

एक टैक्स नोटिस अक्सर करदाताओं को चिंतित छोड़ देता है। लेकिन यदि आप एक महत्वपूर्ण समय सीमा से चूक जाते हैं या किसी प्रक्रिया का पालन करने में कोई त्रुटि करते हैं तो आपको एक आयकर नोटिस भेजा जा सकता है।

आयकर नोटिस के सामान्य कारण

टीडीएस-फॉर्म 26 एएस का सही मिलान न होना: यदि आपके टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स (टीडीएस) की राशि आपके फॉर्म 26 एएस के साथ मेल नहीं खाती है तो आप अपने दरवाजे पर एक टैक्स नोटिस की उम्मीद कर सकते हैं । यहाँ बेमेल कई कारणों से हो सकता है, खासकर यदि आपके पास आय के एक से अधिक स्रोत हैं। ऐसे मामले में, आई-टी विभाग आपको धारा 143 (1 ए) के तहत एक नोटिस भेज सकता है।

आयकर नोटिस से कैसे निपटें?

आप इस नोटिस का जवाब बेमेल के कारण को समझाकर दे सकते हैं। इसके लिए, आप आईटीआर फाइलिंग पोर्टल में लॉग इन करें  और फिर वही करें। इसके अलावा, आपको अपने स्पष्टीकरण का समर्थन करने वाले वैध दस्तावेज जमा करने होंगे।

धारा 143 (1): आई-टी विभाग आपको किसी भी आय के गैर-प्रकटीकरण के लिए धारा 143 (1) के तहत नोटिस भेज सकता है। यदि विभाग बैंकों, वित्तीय संस्थानों या म्यूचुअल फंड हाउस से आपकी  आय के बारे में पूछताछ के माध्यम से यह पाता है कि आपने सभी स्रोतों से राशि का खुलासा नहीं किया है, तो यह आपको उस आधार पर एक नोटिस भेज सकता हैं।

उस स्थिति में आयकर नोटिस से कैसे निपटें?

जैसा कि आप जानते हैं, आयकर में केवल आपका वेतन शामिल नहीं होता है। आपको अपनी आय में अन्य कारको जैसे की संपत्ति से होने वाले लाभ या निवेशों से प्राप्त पूँजीगत लाभ को भी शामिल करना चाहिए । इसके अलावा, सावधि  जमा में किए गए निवेश से प्राप्त होने वाले लाभ को भी आयकर रिटर्न दाखिल करते समय घोषित करने की आवश्यकता होती है।

आपको यह भी ध्यान देना चाहिए कि आपके टैक्स रिटर्न में एक विसंगति आपको 30 दिनों के भीतर अतिरिक्त कर राशि का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी बनाती है। आप वैध प्रमाण के साथ नोटिस का जवाब भी दे सकते हैं और अपने आईटीआर विवरण दाखिल करते समय आपके द्वारा की गई किसी भी त्रुटि की व्याख्या कर सकते हैं।

धारा 143 (2): धारा 143 (2) के तहत एक नोटिस का अर्थ है कि विभाग आपके आईटीआर का मूल्यांकन या जाँच कर रहा है। आपको निर्धारित समय अवधि के भीतर इस तरह के नोटिस का जवाब देना आवश्यक है। इसलिए, आपको प्रतिक्रिया के लिए सभी दस्तावेजों को तैयार रखना चाहिए।

धारा 139 (9): इसके अलावा, आपको गलत आईटीआर फॉर्म के लिए नोटिस प्राप्त हो सकता है। यह आयकर नोटिस को आकर्षित करने का एक सामान्य कारण है। उदाहरण के लिए, आपके पास आय के कई स्रोत हैं और आपने गलत आईटीआर फॉर्म का चयन करके रिटर्न दाखिल किया है, तो आपको धारा  139 (9) के तहत एक नोटिस प्राप्त होगा।

आयकर नोटिस से कैसे निपटें?

आई-टी विभाग आमतौर पर धारा 139 (9) के तहत नोटिस के मामले में प्रतिक्रिया के लिए 15 दिनों तक की अनुमति देता है। यदि आप इस अवधि के भीतर जवाब देने में विफल रहते हैं, तो आपके द्वारा भरी गई रिटर्न को अमान्य घोषित किया जा सकता है।

कर नोटिस को आकर्षित करने के लिए अन्य कारण

ऊपर सूचीबद्ध कारणों के अलावा, यदि आप उच्च मूल्य वाले लेनदेन से रिटर्न घोषित करने में विफल रहे हैं या आपके पति या पत्नी के नाम पर किए गए निवेश की रिपोर्ट करने में विफल रहे हैं, तो आपको अपने दरवाजे पर एक नोटिस मिल सकता है।

करदाता की ओर से एक और सामान्य त्रुटि किसी और के नाम पर निवेश का उल्लेख नहीं करना है। उस लेनदेन का भी आपको रिटर्न फ़ाइल करते समय उल्लेख करना चाहिए।

आमतौर पर कर विभाग एक वर्ष में 10 लाख या उससे अधिक की नकद जमा वाले व्यक्तियों की बारीकी से जांच करता है। इसके अलावा, 30 लाख से अधिक की संपत्ति का लेनदेन भी आई-टी विभाग का ध्यान आकर्षित करता है, इसलिए आपको पता होना चाहिए कि आयकर नोटिस क्या है और आयकर नोटिस से कैसे निपटना है।

निष्कर्ष:

अधिकांश आयकर नोटिस के लिए आपको निवेश के प्रमाण के साथ अतिरिक्त डेटा जमा करने की आवश्यकता होती है। इसके अलावा आपको अपनी तरफ से की गई त्रुटि की व्याख्या करने की आवश्यकता है यदि कोई हो। इसलिए  दाखिलीकरण प्रक्रिया को ठीक से समझने और आपके द्वारा किए गए सभी निवेश का रिकॉर्ड रखने का यह एक अच्छा अभ्यास है।