What is the difference between RII, NII, QIB and anchor investor?

Podcast Duration: 6:49
आर आई आई, एन आई आई, क्यू आई बी और एंकर इन्वैस्टर के बीचमें क्या फ़र्क है? नमस्ते दोस्तों, एंजेल ब्रोकिंग के इस पॉडकास्ट में आपका स्वागत है। चलिये देखते हैं की आर आई आई, एन आई आई, क्यू आई बी और मुख्य निवेशक में क्या फर्क है। क्यों आपको लगा संक्षेपतिकरण केवल नयी पीढ़ी के लोगों से आते है? सिर्फ एल ओ एल और आर ओ एफ़ एल और यो लो और फो मो जैसे ही शब्द संक्षेप में होते हैं। जी नहीं, शेयर बाज़ार को छोटे रूप और संक्षेपतिकरण से प्यार है। आर आई आई, एन आई आई, क्यू आई बी, आई पी ओ से जुड़े कुछ छोटे रूप हैं। जो खुद इनिश्यल पब्लिक ऑफरिंग का छोटा रूप है। जिसका मतलब है - कि जब कोई कंपनी पहली बार अपने शेर आम जनता के खरीदने लिए प्रस्तुत करती है। यह वर्गिकरण आई पी ओ में आबंटन और प्राथमिकता देने के लिए बनाया गया है, जैसे फ्लाइट पर चड़ने के समय व्यापारी वर्ग, बुज़ुर्गों या गर्भवती महिलाओं को प्राथमिकता दी जाती है। सेबी ने यह वर्गिकरण किया था। आर आई आई खुदरा एकमात्र व्यक्ति। एन आई आई का का अर्थ है गैर - संस्थागत निवेशकऔर क्यू आई बी का अर्थ है निपुण संस्थागत बोली लगाने वाला। मुख्य निवेशक तो पहले से ही पूर्ण रूप है। यह चार वर्ग प्राथमिक रूप से बनाए गए ताकि सभी निवेशकों और सबसे ज्यादा संख्या के को आई पी ओ में भाग लेने का मौका मिले। कोई भी आई पी ओ के पहले आम लोग काफी उत्सुक रहते हैं, लोग आई पी ओ में शेर लेने के लिए उत्सुक रहते हैं क्योंकि यह कमाने के एक अच्छे तरीके के रूप में देखा जाता है। सच बोलूँ तो हर आई पी ओ में कमाई अलग है; निवेशकों को थोड़ा सोच समझ के निवेश करना चाहिए। आज कि चर्चा में यह बोलना सुरक्षित है कि आई पी ओ के संदर्भ में ज़्यादातर मांग - आपूर्ति से ज्यादा होती है। ज्यादा निवेशकों को मौका देने के लिए सेबी ने यह 4 वर्ग पेश किए हैं, ताकि हर वर्ग को आई पी ओ का कुछ निश्चित प्रतिशीत मिल पाये। चलिये पहले आर आई आई को समझने से शुरू करते हैं। खुदरा अकेला निवेशक ओर आर आई आई को कुल मिलकर 35% शेयर ऑफर किए जाते हैं। इन निवेशकों को रुपये 200,000 से ज्यादा के शेयर नहीं खरीदने दिये जाते। यह लिमिट रखी गयी है ताकि ज़्यादा लोग निवेश कर सकें। भारत के नागरिक, प्रवासी भारतीय और एच यू एफ़ इस वर्ग के लिए आवेदन कर सकते हैं। 35% कुल शेयर आबंटित करने के बाद भी, आई पी ओ को और खरीदा जा सकता है जिससे बेचने के लिए और आई पी ओ नहीं बचेंगे। ऐसे में यदि आई पी ओ का दुगनी बार अत्यधिक मात्र में आवेदन हुआ है तो 2 में से केवल 1 निवेशक को आबंटन दिया जाता है। इसी तरह 3 बार, 4 बार और आगे भी चलता रहता है।आवेदनकर्ताओं के नाम लॉटरी से निकले जाते हैं। जो निवेशक इस वर्ग में शेयर खरीदते हैं वो ज़्यादातर कट-ऑफ मूल्य पर ही खरीद सकते हैं। यह मूल्य कंपनी द्वारा बाज़ार में आई पी ओ कि मांग को देखते हुए रखा जाता है। जब निवेशक कट -ऑफ मूल्य पर आई पी ओ के लिए आवेदन करते हैं, उन्हें काफी ज्यादा मूल्य पर बिड करना होता है। बाद मैं अगर कम कीमत तय होती है तो आर आई आई कि बाकी राशि वापस मिल जाती है। आर आई आई आबंटन के दिन तक अपना आवेदन वापस ले सकते हैं। एन आई आई को 15 % आबंटन किया जाता है। इस वर्ग मैं भी निवेशक 200,000 रुपये से ज्यादा के शेयर नहीं खरीद सकते। भारतीय नागरिक और प्रवासी भारतीय जो इसके लिए योग्य हैं , इसके लिए आवेदन कर सकते हैं। एच यू एफ़ इस वर्ग में कंपनी, ट्रस्ट, वैज्ञानिक संस्था और सोसाइटी के रूप में आवेदन कर सकते हैं। 15% आबंटन इस वर्ग के लिए काफी कम पड़ जाता है क्योंकि इसमें मांग बहुत ज्यादा होती है। आबंटन के समय प्रतिशत निम्न रूप से रहता है- अगर आई पी ओ दस गुना ज्यादा खरीदा जाता है तो निवेशक जिन्होने 100 के लिए आवेदन किया है उसे केवल 10 शेयर ही मिलेंगे। एन आई आई आबंटन के दिन तक अपना आवेदन वापस ले सकते हैं। जैसा की आपने देखा होगा आर आई आई और एन आई आई क कुछ नियम एक जैसे हैं। महत्वपूर्ण फर्क यह है की एन आई आई कैट-ऑफ मूल्य पर बिड नहीं कर सकती। प्रमाणित संस्थागत बिडर (जिसे क्यू आई बी भी बोला जाता है) बड़े निवेशक होते हैं। जैसे की बैंक, म्यूचुअल फ़ंड और दूसरे आर्थिक संस्थान। इनको कुल ऑफर का 50% मिल जाता है। इस वर्ग में आवेदन करने वाले कोई भी निवेशक का सेबी रेजिस्ट्रेशन होना ज़रूरी है। यह निवेशक भी कैट ऑफ मूल्य पर बिड नहीं कर सकते और इन्हें आई पी ओ के बंद हो जाने के बाद अपने आवेदन को निरस्त करने की भी छूट नहीं है। सेबी के नियमों के अनुसार क्यू आई बी निवेशक बाकी दो वर्गों की तरह यह आवेदन निरस्त करने के लिए आबंटन तक इंतज़ार नहीं कर सकते । मुख्य निवेशक वो क्यू आई बी निवेशक हैं जो 10 करोड़ या उससे ज्यादा निवेश कर रहे हैं। करीब 60 % क्यू आई बी, मुख्य निवेशक हो सकते हैं। इनके लिए अलग समय सीमा होती है और अलग कीमत भी तय की जाती है। जैसा की आप अंदाज़ा लगा सकते हैं मुख्य निवेशक किसी भी आई पी ओ के लिए बाज़ार में एक हवा बना सकता है उसके आने से भी पहले, यह हीरो लोग हैं। कुछ नियम हैं जैसे कंपनी ने जिन बेंको से लोन लिया हो, संस्थापकों के सगे सम्बंधी यह मुख्य निवेशक नहीं बन सकते। चलो आई पी ओ में निवेश करना चाहते हो तो आप एंजेल ब्रोकिंग के साथ अपनी यात्रा का आगाज कर सकते हो। एंजेल ब्रोकिंग का एप मुफ्त डाउनलोड के लिए उपलब्ध है। आप अपने शेयर बाज़ार के ज्ञान को बढ़ा सकते हो फ्री ब्लॉग, वीडियो और पॉडकास्ट के जरिये। ट्रेडिंग अकाउंट काफी जल्दी बस 1-2 दिन में बन सकता है, यह सही है आई पी ओ बाज़ार की उत्सुकता बढ़ा देता है पर बीध का हिस्सा मत बनिए। अनुसंधान करके खुद तय करो की किसी निवेश में कमाई है या नहीं। मिलते हैं अगले पॉडकास्ट पर तब तक के लिए एंगेल ब्रोकिंग की तरफ से अलविदा और शुभ निवेश। निवेश बाज़ार जोखिमों के आधीन है कृपया सभी दस्तावेज़ ध्यान से पढ़ें।