इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि इक्विटी शेयरधारक एक कंपनी के मालिक होता है, वे उस मुनाफे पर दावा करता है जिसे उक्त कंपनी उत्पन्न करती है। एक कंपनी द्वारा उत्पन्न इन मुनाफ़ों को समय-समय पर लाभांश के माध्यम से शेयरधारकों को वितरित किया जाता है। चूंकि ये लाभांश इक्विटी शेयरधारकों के लिए स्थिर आय के स्रोत के रूप में कार्य करते हैं, इसलिए कई निवेशक लाभांश निवेश रणनीति को अपनाते हैं।

हालांकि, एक कंपनी को हमेशा अपने मुनाफे को नकद लाभांश के माध्यम से वितरित करने की आवश्यकता नहीं होती है। वास्तव में, यहाँ भी एक और तरीका है जिसके माध्यम से एक कंपनी अपने मुनाफे को अपने इक्विटी शेयरधारकों में शेयर लाभांश के माध्यम से वितरित कर सकती है। यदि आप लाभांश निवेश रणनीति अपनाने की योजना बना रहे हैं तो नकद लाभांश और शेयर लाभांश के बीच का अंतर जानना आपके लिए अति आवश्यक है। यहाँ नकद लाभांश बनाम शेयर लाभांश का गहराई से अवलोकन किया गया है।

नकद लाभांश क्या है?

जब निवेशक और अन्य वित्तीय विशेषज्ञ ‘लाभांश’ शब्द का उपयोग करते हैं, तो वे आमतौर पर नकद लाभांश का जिक्र करते हैं। जब एक लाभदायक कंपनी अपने शेयरधारकों को नकद के माध्यम से लाभांश वितरित करती है, तो इसे नकद लाभांश के रूप में जाना जाता है। यहां एक उदाहरण दिया गया है जो इस अवधारणा को बेहतर ढंग से समझने में आपकी सहायता कर सकता है।

मान लीजिए कि कोई कंपनी एबीसी लिमिटेड है। कंपनी ने लगभग 1,00,000 इक्विटी शेयर जारी किए हैं। वित्तीय वर्ष 2019 – 2020 के लिए कंपनी द्वारा अर्जित शुद्ध लाभ लगभग 20 लाख रुपये है। कंपनी स्वयं के द्वारा अर्जित किए गए इस मुनाफे के पूरे हिस्से को अपने शेयरधारकों में वितरित करने का फैसला करती है। और इसलिए, कंपनी द्वारा जारी किए गए प्रत्येक इक्विटी शेयर के लिए नकदी के माध्यम से वितरित करने हेतु पूरे लाभांश की गणना निम्न प्रकार से की जा सकती है।

प्रति इक्विटी शेयर लाभांश = शुद्ध लाभ ÷ जारी किए गए इक्विटी शेयरों की कुल संख्या

प्रति इक्विटी शेयर लाभांश = रु.20,00,000 ÷ 1,00,000 = रु. 20/-

चूंकि कंपनी ने अपने मुनाफे को नकद के रूप में वितरित करने का निर्णय लिया है, इसलिए यह उदाहरण नकद लाभांश का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।

शेयर लाभांश क्या है? 

अब जब आप जानते हैं कि नकद लाभांश क्या है, तो चलिए आगे बढ़ते हैं और शेयर लाभांश की अवधारणा पर एक नज़र डालते हैं।

जब एक कंपनी, चाहे मुनाफे में हो या नहीं, कंपनी में अपने निवेश के बदले में अपने इक्विटी शेयरधारकों को अपने स्वयं के शेयरों को वितरित करने का फैसला करती है, तो कहा जाता है कि उसने शयर लाभांश वितरित किया गया है। यहां शेयर लाभांश का एक उदाहरण दिया गया है जो इस अवधारणा को बेहतर ढंग से समझने में आपकी सहायता कर सकता है।

चलिए दोबारा उसी कंपनी एबीसी लिमिटेड का उदाहरण लेते हैं। यहां फिर से, कंपनी ने लगभग 1,00,000 इक्विटी शेयर जारी किए हैं। कंपनी अपने इक्विटी शेयरधारकों को लाभांश के साथ पुरस्कृत करने का फैसला करती है। लेकिन कंपनी का शुद्ध लाभ दुर्भाग्य से उसके सभी इक्विटी शेयरधारकों को नकद लाभांश के रूप में भुगतान करने के लिए पर्याप्त नहीं है। और इसलिए, कंपनी अपने इक्विटी शेयरधारकों को अपने स्वयं के इक्विटी शेयरों, जो कि जारी नहीं किए गए हैं, को आवंटित करने का फैसला करती है। कंपनी अपने इक्विटी शेयरधारकों को 10% शेयर लाभांश वितरित करने का फैसला करती है।

इसका प्रभावी रूप से यह मतलब होगा कि कंपनी को अपने इक्विटी शेयरधारकों को अतिरिक्त 10,000 शेयर (1,00,000 इक्विटी शेयर x 10%) आवंटित करने होंगें। इसलिए, एक शेयरधारक द्वारा रखे गए प्रत्येक 10 इक्विटी शेयरों के लिए, उसे कंपनी का 1 इक्विटी शेयर लाभांश भुगतान के रूप में पूरी तरह से मुफ्त में प्राप्त होगा। एक बार शेयर आवंटित हो जाने के बाद, निवेशक या तो शेयर को बनाए रखने का विकल्प चुन सकते हैं या इसे मौजूदा बाजार मूल्य पर शेयर बाजार में बेच सकते हैं। यह उदाहरण शेयर लाभांश का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।

नकद लाभांश और शेयर लाभांश के बीच अंतर

चूंकि अब आप नकद लाभांश बनाम शेयर लाभांश की अवधारणाओं के बारे में जानते हैं, चलिए नकद और शेयर लाभांश के बीच के अंतर पर एक नज़र डालते हैं। इन दोनों के बीच सबसे महत्वपूर्ण और प्राथमिक अंतर नीचे विस्तारपूर्वक दिया गया है।

नकदी भंडार की सहभागिता: 

यह निश्चित रूप से नकद और शेयर लाभांश के बीच सबसे महत्वपूर्ण अंतर है। इसमें किसी कंपनी द्वारा अपने इक्विटी शेयरधारकों को नकद लाभांश का भुगतान करने के लिए उक्त इकाई के नकदी भंडार का दोहन करना शामिल है। नकद लाभांश के साथ, कंपनी के मुनाफे को अपने व्यवसाय में पुनर्निवेश करने के बजाय भुगतान किया जाता है।

दूसरी ओर, शेयर लाभांश के साथ, किसी कंपनी को अपने नकदी भंडार या मुनाफे का दोहन नहीं करना पड़ता है क्योंकि यह केवल अपने इक्विटी शेयरधारकों को अपना शेयर जारी कर रही होती है।

कंपनी के लिए अप्रत्यक्ष प्रभाव:

चूंकि एक कंपनी अपने इक्विटी शेयरधारकों को नकद लाभांश जारी करने के लिए अपने नकदी भंडार का दोहन करती है, इसलिए इस तरह कि चाल से उसकी फ़ंड में गिरावट आती है। यह कई बार किसी कंपनी के लिए हानिकारक सिद्ध हो सकता है क्योंकि यह आपातकालीन उद्देश्यों कि पूर्ति के लिए अपने नकदी भंडार का दोहन नहीं कर सकता है।

इसके विपरीत, एक कंपनी का नकदी भंडार शेयर लाभांश वितरण की स्थिति में यथावत बना रहता हैं। लेकिन, चूंकि कंपनी अनिवार्य रूप से अपने मौजूदा शेयरधारकों को अधिक शेयर जारी कर रही है, इसलिए वह पूरी इकाई को नियंत्रित करने में कमजोर पड़ सकती है।

शेयरधारक के लिए अप्रत्यक्ष प्रभाव: 

नकद और शेयर लाभांश के बीच एक और बड़ा अंतर उस तरीके में निहित है जिससे एक शेयरधारक प्रभावित होता है। यदि किसी कंपनी के इक्विटी शेयरधारक को नकद लाभांश प्राप्त होता है, तो इसे एक आय माना जाता है और इसलिए शेयरधारक को इस आय का उल्लेख करना होगा और उस पर कर का भुगतान करना होगा।

लेकिन शेयर लाभांश के साथ, चूंकि इक्विटी शेयरधारक केवल अधिक इक्विटी शेयर प्राप्त करता हैं, इसलिए उसे आय नहीं माना जाता है और इसलिए वह कराधान के लिए उत्तरदायी नहीं है। इसमें कहा गया है, यदि कोई शेयरधारक खुले बाजार में अपनी शेयरहोल्डिंग बेचता है तो उसे कर का भुगतान करना होगा क्योंकि इससे राजस्व में कमी होती है।

निष्कर्ष 

जैसा कि आप उपरोक्त तीन बिंदुओं से देख सकते हैं, ये नकद लाभांश और शेयर लाभांश के बीच प्राथमिक अंतर हैं। यदि आप एक निवेशक हैं जो आय के निरंतर और स्थिर स्रोत की तलाश में हैं, तो नकद लाभांश आपके लिए सही तरीका हो सकता है क्योंकि यह बहुत कम जोखिमों से भरा है।

इसके विपरीत, यदि आप जोखिम उठाने वाले एक इच्छुक निवेशक है और जो पूंजी और कीमत वृद्धि की तलाश में है, तो ऐसी कंपनी में निवेश करना जो अक्सर शेयर लाभांश का भुगतान करती है, के साथ जाने का आपके लिए एक सही तरीका हो सकता है। लेकिन आखिरकार, जब लाभांश बनाम शेयर लाभांश की बात आती है, तो इनमें कोई स्पष्ट विजेता नहीं है क्योंकि यह सब व्यक्तिगत निवेशक की प्राथमिकताओं पर निर्भर करता है।