एक निवेशक के रूप में, आप दो प्रकार के पूंजी बाजारों से भली भांति परिचित होंगे  -पहला प्राइमरी और दूसरा सेकेंड्री। प्राइमरी पूंजी बाजार आईपीओ बाजार को कहते हैं, जबकि स्टॉक एक्सचेंज को सेकेंड्री पूंजी बाज़ार कहा जाता है। पर क्या आप जानते हैं कि दो प्रकार के  पूंजी बाजार और होते हैं ? इन दोनों अन्य पूंजी बाज़ारों को व्यापारी और निवेशक अपनी भाषा में थर्ड मार्केट और फोर्थ मार्केट कहते हैं। इस लेख के द्वारा हम उदाहरण सहित थर्ड मार्केट के बारे में विस्तार से जानेंगे।

थर्ड मार्केट  क्या है?

थर्ड मार्केट वह स्थान है जहाँ कम्पनियों के स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड शेयरों का स्टॉक एक्सचेंज द्वारा व्यापार न कर के उनका व्यापार ओवर-द-काउंटर किया जाता है। 

जब निवेशक तीसरे बाजार के माध्यम से किसी कंपनी के शेयरों का व्यापार करते हैं, तब वे  पूरे सेकेंड्री मार्केट और इसके प्रतिभागियों जैसे ब्रोकिंग हाउस और स्टॉक एक्सचेंज को बाईपास करते हैं। ऐसा करके, निवेशक ब्रोकरेज फीस, टर्नओवर फीस, करों और अन्य सहायक लागतों पर बहुत बचत कर सकते हैं। थर्ड मार्केट के माध्यम से खरीदने वाले व्यापारी को स्टॉक एक्सचेंज से भी कम दाम में स्टॉक खरीदने का मौका मिलता है। 

थर्ड  मार्केट  में कौन भाग लेता है ?

थर्ड  मार्केट  मुख्य रूप से बड़े संस्थागत निवेशकों जैसे हेज फंड, पेंशन फंड और निवेश बैंक द्वारा उपयोग किया जाता है। ये प्रतिभागी आम तौर पर बड़े पैमाने पर व्यापार करने के लिए थर्ड मार्केट  का उपयोग करते हैं, इस तरह के व्यापार को बल्क डील या ब्लॉक डील कहते हैं।उनके द्वारा यह कहा जाता है कि इस बाजार में केवल वही लोग नहीं हैं,इस बाजार में बहुत से लोग हैं। हाल के वर्षों में, खुदरा निवेशकों और धनी लोगों ने भी थर्ड मार्केट का प्रयोग करना शुरू कर दिया है।

संस्थागत निवेशक थर्ड मार्केट को क्यों पसंद करते हैं?

पहला कारण यह है कि  संस्थागत निवेशक थर्ड मार्केट का प्रयोग  थोक सौदा करने के लिए करते हैं क्योंकि  इस तरह के व्यापार में लागत काफी कम है। संस्थागत निवेशकों का काम इतने बड़े स्तर पर होता है कि  सहायक लागत जैसे ब्रोकरेज, करों और टर्नओवर फीस करोडों में पहुँच जाता है। इस तरह का अतिरिक्त खर्च निवेशकों के लिये हानिकारक होता है। 

आइए थर्ड मार्केट को कुछ काल्पनिक उदाहरणों से समझें-

मान लें कि आप एक निवेश फर्म हैं जो अशोक लीलैंड लिमिटेड के 1 लाख शेयर खरीदने की तलाश में हैं, जिसकी कीमत एक्सचेंज में  100 रुपये प्रति शेयर है। आप सेकेन्ड्री मार्केट के माध्यम से ऐसा कर सकते हैं। लेकिन फिर, आपको एक्सचेंज के माध्यम से व्यापार करने में शामिल विभिन्न फीस और अन्य लागतों का सामना करना होगा।

आइए मान लें कि एक्सचेंज द्वारा  व्यापार से जुड़ी पूरी लागत व्यापार के कुल कारोबार का लगभग 4% तक है।

— इसका मतलब है कि आपको लगभग 4,00,000 रुपये (1 लाख शेयर x 100 रुपये प्रति शेयर) x 4%} के साथ भाग लेना होगा।

— इससे आपकी स्वामित्व की लागत रु. 100 प्रति शेयर से लगभग रु. 104 प्रति शेयर {(रुपये 1,00,00,000 + रुपये 4,00,000) ÷ 1 लाख शेयर} तक बढ़ जाती है।

— इस अतिरिक्त लागत को थर्ड मार्केट के माध्यम से टाला जा सकता है।

एक और प्रमुख कारण यह है कि थर्ड मार्केट  खरीदारों और विक्रेताओं दोनों को गुमनामी प्रदान करता है। सभी संस्थागत निवेशक सार्वजनिक डोमेन में होने के लिए कंपनियों में अपने निवेश के बारे में जानकारी नहीं चाहते हैं। थर्ड मार्केट  उन्हें व्यापार के साथ ही गुमनाम रहने की लक्जरी देता है। वास्तव में, थर्ड मार्केट  में गुमनामी इतनी अधिक है कि न तो खरीदार विक्रेता की पहचान जान सकता है और न ही विक्रेता खरीदार की पहचान जान सकता है।

निष्कर्ष

थर्ड मार्केट  व्यापार और निवेश का एक अभिन्न हिस्सा हैं। कंपनियों के बड़े-बड़े स्टॉकों का व्यापार आसानी से केवल थर्ड मार्केट के द्वारा ही किया जा सकता है , जबकि द्वितीयक बाजार में भारी ट्रेडों और शेयरों के बड़े पैमाने पर ब्लॉकों को बिक्री के लिए रखना अनचाहे  स्पाइक का कारण बन सकता है  और स्टॉक की कीमतों को बहुत बढा सकता है और थोड़े समय के भीतर ऊपरी सर्किट को मार सकता है। यह बदले में शेयर बाजार में ट्रेडों सही प्रवाह को बाधित करता है। एक तरह से थर्ड मार्केट  में उपस्थित थोक सौदा सेकेन्ड्री मार्केट पर होने वाले तनाव को कम करने में मदद करता है।