शुरुआती निवेशकों के लिए विस्तृत शेयर बाज़ार गाइड

हम सभी जानते हैं कि शेयर बाज़ार की भाषा में आपके पास शेयर होने का मतलब है कंपनी में आपका स्वामित्व का होना। ऐसे में अगर किसी कंपनी ने 100 शेयर जारी किए हैं और आपके पास सिर्फ़ एक शेयर है तो इसका मतलब ये हुआ कि कंपनी में आपकी 1% हिस्सेदारी है। बड़ा सवाल यह है कि शेयरों में निवेश कैसे करें और शेयर बाज़ार में किस तरह से निवेश किया जाए? हमें यह भी समझना होगा कि शेयर बाज़ार क्या है, शेयर बाज़ार में निवेश कैसे किया जाता है और भारत में शेयरों की ख़रीदारी कैसे की जाती है। आइए, हम इक्विटी मार्केट पर एक नज़र डालते हैं और जानते हैं कि भारतीय इक्विटी मार्केट में शेयरों की ख़रीदारी कैसे होती है।

स्टॉक मार्केट क्या है और क्या यह शेयर मार्केट से अलग है?

शेयरों के ख़रीदारों और विक्रेताओं का एक साझा मंच है शेयर बाज़ार। 1995 में BOLT लागू किए जाने से पहले लोग ट्रेड रिंग में खड़े होकर लेन-देन किया करते थे। आजकल सभी तरह के ट्रेड एक दलाल के कार्यालय से या फिर इंटरनेट के माध्यम से कंप्यूटर टर्मिनलों पर होता है। शेयर बाज़ार और स्टॉक मार्केट एक ही मंच के दोन नाम है।

शेयर मार्केट की मूल बातें

भारतीय शेयर बाज़ार की बुनियादी बातें करते हुए निवेश शुरू करने से पहले यह जानना महत्वपूर्ण है कि शेयर बाज़ार क्या है और यह कैसे काम करता है। यह एक ऐसी जगह है जहां विभिन्न कंपनियों के शेयरों का कारोबार किया जाता है। भारत में दो प्राथमिक एक्सचेंज हैंनेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसी) निवेश आपकी सुरक्षा और सुरक्षित भविष्य की कुंजी है। हालांकि मुद्रास्फीति के असर से बचने के लिए साधारण व पुराने वित्तीय साधनों में निवेश करना पर्याप्त नहीं है। अपने निवेश के ज़रिए कुछ अतिरिक्त आय प्राप्त करने के लिए शेयर बाज़ार स्टॉक विकल्प के तौर पर प्रतिभूतियों की ख़रीद और व्यापार का आकर्षक अवसर प्रदान करता है। एन्जिल ब्रोकिंग शेयर बाज़ार के मूल सिद्धांतों, व्यापार करने के तरीके, वित्तीय साधनों के प्रकार और सफल व्यापारिक रणनीतियों के बारे में जानकारी प्रदान करके शेयर बाज़ार के तौर-तरीकों को समझने के लिए हर उत्सुक निवेशक को मौका देता है। उसे एक सामान्य निवेशक से कहीं अधिक समझदार निवेशक बनने में मदद करता है ताक़ि निवेश के जरिए निवेशक को बेहतर रिटर्न प्राप्त हो.

प्राथमिक बाजारों और द्वितीय बाजारों में क्या अंतर है?

जब एक कंपनी प्रारंभिक सार्वजनिक प्रस्ताव (आईपीओ) के साथ आती है तो इसे प्राथमिक बाज़ार कहा जाता है। आईपीओ का सामान्य उद्देश्य शेयर बाज़ार में स्टॉक सूचीबद्ध करना है। एक बार शेयर सूचीबद्ध हो जाता है तो फिर द्वितीय बाज़ार में ट्रेडिंग शुरू होती है। शेयरों को ख़रीदना और बेचना किसी भी अन्य वस्तु की ख़रीद-बिक्री की तरह ही होता है।

शेयर बाजार में शेयरों की कीमत कैसे तय होती है और इ्न्हें कौन निर्धारित करता है? 

शेयर ट्रेडिंग की मूल बातें समझते हुए हमारे लिए जानना जरूरी है कि बाज़ार ही शेयरों की कीमत निर्धारित करता है। आमतौर पर शेयरों का मूल्य उस वक्त बढ़ जाता है जब कंपनी बहुत तेज़ी से से बढ़ रही हो या फिर बहुत अच्छा मुनाफ़ा कमा रही हो या फिर कंपनी को नए ऑर्डर मिलें हों। जैसे ही किसी शेयर की मांग बढ़ जाती, वैसे ही अधिक से अधिक निवेशक अधिक कीमतों पर उस शेयर को ख़रीदना चाहते हैं। कुछ इस तरह उस शेयर की कीमत बढ़ जाती है। शेयर की कीमत मांग और आपूर्ति पर निर्भर होती हैं।

स्टॉक इंडेक्स क्या हैं?

भारतीय शेयर बाज़ार की मूल बातें जानना चाहते हैं तो आपके के लिए यह जानना ज़रूरी है कि कंपनियां भारतीय शेयर बाजारों पर अपने शेयर सूचीबद्ध करती हैं और इनमें से कुछ समान शेयरों को एक सूचकांक बनाने के लिए एक साथ समूहीकृत किया जाता है। इसका वर्गीकरण कंपनी के आकार, उद्योग, बाजार पूंजीकरण या अन्य श्रेणियों के आधार पर हो सकता है। बीएसई सेंसेक्स में 30 स्टॉक शामिल हैं और एनएसई में 50 स्टॉक शामिल हैं। अन्य में बैंक्सेक्स जैसे सेक्टर इंडेक्स, बीएसई मिडकैप या बीएसई स्मॉल कैप आदि शामिल हैं।

ऑफ़लाइन ट्रेडिंग क्या है और ऑनलाइन ट्रेडिंग क्या है?

शेयरों को ऑफ़लाइन और ऑनलाइन कैसे ख़रीदा जा सकता है? ऑनलाइन ट्रेड का मतलब है शेयरों को अपने कार्यालय या अपने घर में आराम से बैठकर इंटरनेट के ज़रिए ख़रीदा अथवा बेचा सकता है। आपको बस अपने ट्रेडिंग खाते में लॉग इन करने की आवश्यकता है और आप शेयर खरीद और बेच सकते हैं। ऑफ़लाइन ट्रेड करने के लिए आपको ब्रोकर के कार्यालय में जाना होगा या फिर ब्रोकर को टेलिफ़ोन करके ट्रेड करने के लिए कहना होगा।

शेयर मार्केट में एक ब्रोकर की भूमिका क्या होती है?

ब्रोकर यानि कि दलाल ट्रेड के ज़रिए शेयरों की ख़रीद और बिक्री में आपकी मदद करता है। दलाल आम तौर पर ख़रीदारों को विक्रेता और विक्रेताओं को ख़रीदार खोजने में सहायता करता है। अधिकांश दलाल कौन-सा स्टॉक ख़रीदना चाहिए, कब कौन-से स्टॉक बेचने चाहिए और शुरुआती तौर पर निवेश करनेवालों को शेयर बाज़ार में पैसा कैसे निवेश करना है, इसकी सलाह देते हैं। वे शेयर बाज़ार में ट्रेड करने के लिए आपकी सहायता भी करते हैं। दलाल को उनकी सेवाओं के लिए एक तयशुदा रकम दलाली के तौर पर दी जाती है। 

क्या कोई भी शेयर मार्केट में शेयर ख़रीद और बेच सकता है?

कोई भी व्यक्ति जो सभी शर्तों को मानने के लिए राज़ी हो जाता है, वह बाज़ार में शेयर ख़रीद और बेच सकता है। इसके लिए आपको एक दलाल के ज़रिए एक ट्रेडिंग खाता खोलने के लिए की जरूरत होती हैट्रेडिंग अकाउंट खोलने के बाद शेयरों की ख़रीद और बिक्री संभव हो जाती है।

ट्रेडिंग खाता क्या डीमैट अकाउंट जैसा ही है?

दोनों के बीच एक महत्वपूर्ण अंतर है। ट्रेडिंग अकाउंट के ज़रिए आप शेयर ख़रीदते और बेचते हैं। डीमैट खाते में शेयर सुरक्षित रखे जाते हैं। जब आप अपने ट्रेडिंग खाते के ज़रिए शेयर खरीदते हैं, तो आपके खाते में से पैसे डेबिट हो जाते हैं और आपके डीमैट खाते में पैसे जमा हो जाते हैं। जब आप अपने शेयर बेचते हैं, तो ठीक इसका उल्टा होता है।

ट्रेडिंग और निवेश का क्या मतलब है?

ट्रेडिंग का मतलब अल्पावधि ट्रेड ख़रीद और शेयरों की बिक्री करना है, जबकि निवेश करने का अर्थ शेयरों की दीर्घकालिक ख़रीद करने से है। एक ट्रेडर सामान्य रूप से तेज़ी से पैसे कमाने की कोशिश करता है जबकि निवेशक शेयर मार्केट में एक अच्छा स्टॉक खरीदने की कोशिश करता है और स्टॉक मूल्य के बढ़ने की प्रतीक्षा करता है।

रोलिंग निपटान क्या है?

शेयर बाज़ार के लिए जारी किये गये हर आदेश का निपटारा किया जाना आवश्यक होता है। इस कार्यप्रणाली के तहत ख़रीदारों को अपने शेयर प्राप्त होते हैं और विक्रेताओं को बिक्री पर आय प्राप्त होती है। निपटान वह प्रक्रिया है जिसमें ख़रीदार अपने शेयरों की ख़रीद करते हैं और विक्रेताओं को अपना पैसा मिलता है। रोलिंग निपटान तब होता है जब सभी तरह के लेन-देन का दिन के अंत में निपटारा कर दिया जाता है। दूसरे शब्दों में, ख़रीदार को अपनी ख़रीद के लिए भुगतान करना होता है और विक्रेता शेयर बाज़ार के ज़रिए एक दिन में बेचे गए शेयरों को ख़रीदार तक पहुंचाता है। शेयर बाज़ार निपटारे के टी+2 तरीकों को अपनाते हैं, जिसका अर्थ है कि लेन-देन एक दिन में पूरा करना करना होता है और  इस ट्रेड का निपटारा पहले दिन के अलावा अतिरिक्त दो कार्य दिवसों के भीतर पूरा किया जाना आवश्यक होता है।

सेबी क्या है?

सेबी यानि कि भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड। चूंकि शेयर बाज़ाए में निवेश करने में जोख़िम निहित होता है, ऐसे में एक बाज़ार नियामक की आवश्यकता होती है। सेबी को अधिकारिक रूप से इस तरह के अधिकार प्रदान किये जाते हैं और उसे बाज़ारों को विकसित करने और विनियमित करने की ज़िम्मेदारी दी जाती है। उसके बुनियादी उद्देश्यों में निवेशकों के हितों की रक्षा करना, शेयर बाज़ार का विकास करना और उसकी कार्यप्रणाली को विनियमित करना शामिल है।

क्या इक्विटी मार्केट और डेरिवेटिव मार्केट एक समान हैं?

दोनों इक्विटी बाजार और व्युत्पन्न बाजार समग्र शेयर बाज़ार का हिस्सा हैं। अंतर कारोबार उत्पादों में निहित है। इक्विटी बाज़ार शेयरों और शेयरों के सौदे जबकि व्युत्पन्न बाज़ार वायदा और विकल्प (एफ एंड ) में सौदे से जुड़ा हुआ है। एफ एंड मार्केट इक्विटी शेयर जैसी अंतर्निहित परिसंपत्ति पर आधारित है।

मौलिक और तकनीकी विश्लेषण क्या है?

मौलिक विश्लेषण कंपनी के व्यापार को समझने को लेकर किया जाता है, इसकी वृद्धि की संभावनाओं, इसकी लाभप्रदता, इसके ऋण के स्वरूप जैसे तकनीकी विश्लेषण चार्ट और पैटर्न पर अधिक केंद्रित है और भविष्य के लिए आवेदन करने के लिए पिछले पैटर्न का पता लगाने की कोशिश करता है। निवेशकों द्वारा बुनियादी बातों का अधिक उपयोग किया जाता है जबकि तकनीकी विश्लेषण का व्यापारियों द्वारा अधिक उपयोग किया जाता है।

शेयर बाज़ार में भारत में कम पैसे के साथ निवेश कैसे करें?

किसी तरह का न्यूनतम निवेश आवश्यक नहीं है क्योंकि आप किसी कंपनी का एक शेयर भी ख़रीद सकते हैं। अगर आप 100 रुपए के बाज़ार मूल्य का स्टॉक खरीदते हैं और ऐसे में आप सिर्फ़ एक शेयर ख़रीदते हैं तो आपको केवल 100 रुपये का निवेश करना होगा। बेशक़, आपको ब्रोकरेज और संवैधानिक शुल्क अतिरिक्त रूप से देना होगा।

ब्रोकर को हमें वैधानिक शुल्क क्यों देना पड़ता है?

केंद्र अथवा राज्य सरकार द्वारा जीएसटी, स्टाम्प ड्यूटी और एसटीटी जैसे वैधानिक शुल्क लगाए जाते हैं। दलालों को इनका लाभ नहीं मिलता है। दलाल सिर्फ़ अपनी ओर से इन्हें एकत्रित करता है और इन्हें संबंधित सरकार के पास जमा कराता है।