स्टॉक बाजार निवेशक के रूप में, आपको स्टॉक बाजार की अच्छी समझ होनी चाहिए। एक बार जब आप बुनियादी बातों में महारत हासिल कर लेते हैं, तो आपको मौलिक विश्लेषण और तकनीकी संकेतकों के मूल्यांकन के माध्यम से लंबी अवधि का निवेश और ट्रेडिंग के अवसरों की तलाश करनी होती है। पॉजिटिव वॉल्यूम इंडेक्स (पीवीआई), नेगेटिव वॉल्यूम इंडेक्स (एनवीआई), प्राइस एक्शन एनालिसिस जैसे तकनीकी संकेतक – कुछ नाम है – आपको बाजार के रुझान और रिवर्सल का आकलन करने की अनुमति देगा, इस प्रकार आप स्टॉक्स और प्रतिभूतियों की कीमत दिशा जान सकते हैं। हालांकि, आपको यह याद रखना चाहिए कि जैसा कि नाम से पता चलता है – पॉजिटिव वॉल्यूम इंडेक्स जैसे मार्केट इंडिकेटर्स केवल मार्ग-सूचक हैं, और उनकी अपनी सीमाएं हैं। स्टॉक बाजार कॉम्प्लेक्स वेरिएबल्स (जटिल चर) द्वारा नियंत्रित होते हैं, और कोई भी संकेतक कितना भी मजबूत क्यों न हो, आप गारंटीड रिटर्न के बारे में आश्वस्त नहीं रह सकते।

पॉजिटिव वॉल्यूम इंडेक्स (पीवीआई) क्या है?

सोचिये, पॉजिटिव वॉल्यूम इंडेक्स क्या है? ठीक है, पीवीआई का उपयोग ट्रेडिंग वॉल्यूम के आधार पर बाजार में मूल्य परिवर्तन के तकनीकी विश्लेषण के लिए किया जाता है। पीवीआई फैक्टरिंग (लेनदारी लेखा क्रय) के बाद मूल्य गतिविधि को इंगित करता है कि क्या वर्तमान ट्रेडिंग वॉल्यूम पिछली अवधि के लिए वॉल्यूम से अधिक है। पीवीआई की गणना आमतौर पर दैनिक आधार पर की जाती है। इसे 255 दिनों के मूविंग एवरेज (एमए) के खिलाफ भी देखा जा सकता है, जो किसी दिए गए वर्ष में औसत ट्रेडिंग दिन है, या एक साप्ताहिक, मासिक, त्रैमासिक और अर्ध-वार्षिक आधार पर है। यदि अलग-अलग समय अवधि के बीच ट्रेडिंग मूल्य समान रहता है, तो पीवीआई सदा एकसां रहेगा। आमतौर पर, पीवीआई का उपयोग पीवीआई के साथ-साथ तकनीकी विश्लेषण के लिए किया जाता है, और जब एक साथ उपयोग किया जाता है, तो विश्लेषण को मूल्य संचय वॉल्यूम संकेतक के रूप में जाना जाता है। पीवीआई की विशेषताओं के बारे में अधिक जानने से पहले, आइए इसके इतिहास पर एक नज़र डालें।

पीवीआई का इतिहास: पॉल एल डाएसर्ट ने न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज (एनवाईएसई) में एक दिन के ट्रेडिंग की वॉल्यूम का विश्लेषण करने के बाद, 1936 में पीवीआई और एनवीआई को विकसित किया। मुख्य रूप से, ट्रेडिंग की वॉल्यूम को देखते हुए, उन्होंने एक विशिष्ट समयावधि के लिए संग्रह किया। जब ट्रेडिंग वॉल्यूम अधिक था, तो उन्होंने इसे पीवीआई कहा, और कम ट्रेडिंग वॉल्यूम के मामले में, उन्होंने इसे एनवीआई कहा। ट्रेडिंग वॉल्यूम में प्रगति और गिरावट बाजार की गतिविधियों की व्याख्या करने के लिए महत्वपूर्ण थी। पीवीआई और एनवीआई ने स्टॉक बाजार में और अधिक स्वीकार किया गया, जब 1976 में यूएसए के सर्वश्रेष्ठ बाजार भविष्यवक्ताओं में से एक नॉर्मन फॉसबैक ने अपने बेस्टसेलर (सबसे ज़्यादा बिकने वाली किताब) में अपनी व्याख्याओं को शामिल किया: ‘स्टॉक मार्केट लॉजिक।’ फॉसबैक ने व्यक्तिगत स्टॉक्स और प्रतिभूतियों के लिए अपने ज्ञान का विस्तार करके पीवीआई और एनवीआई का दायरा बढ़ाया।

पॉजिटिव वॉल्यूम इंडेक्स की गणना के लिए फॉर्मूला: यदि आपको 15 अक्टूबर, 2020 जैसे किसी विशेष दिन के लिए पीवीआई की गणना करनी है, तो आपको गुरुवार के साथ-साथ बुधवार के ट्रेडिंग वॉल्यूम को भी ध्यान में रखना होगा।

यदि गुरुवार का पीवीआई बुधवार की तुलना में अधिक था, तो आप निम्न सूत्र का उपयोग कर सकते हैं: 

PVI = Wednesday’s PVI + ((Thursday’s close-Wednesday’s close)/ Wednesday’s close)*Wednesday’s PVI. 

यदि गुरुवार की ट्रेडिंग वॉल्यूम बुधवार के ट्रेडिंग वॉल्यूम के बराबर या उससे कम थी, तो सूत्र इस प्रकार होगा:

PVI = Wednesday’s PVI. 

पॉजिटिव वॉल्यूम इंडेक्स की अवधारणा को समझना:

– पीवीआई भेड़ चाल का विश्लेषण करने की अवधारणा पर आधारित है, या अनजान निवेशकों के लिए, नॉट-सो-स्मार्ट-मनी के रूप में भी जाना जाता है। इसके विपरीत, एनवीआई मुख्य रूप से चुनिंदा निवेशों, सूचित निवेशकों या स्मार्ट मनी (क्षतिपूर्ति या दंडस्वरूप दिया हुआ धन) पर विचार करता है। तो, पीवीआई में वृद्धि का मतलब है कि नॉट-सो-स्मार्ट-मनी अधिक सक्रिय है, जबकि पीवीआई में कमी यह दर्शाता है कि भेड़ चाल का पैसा (नॉट-सो-स्मार्ट-मनी) बाजारों से बाहर हो रहा है। जब पीवीआई और एनवीआई को पास-पास रखते है, तो आप उपयुक्त ट्रेडिंग अवसरों की योजना बनाने के लिए असमानताओं का विश्लेषण कर सकते हैं। स्मार्ट-मनी और नॉट-सो-स्मार्ट-मनी के बीच अंतर को देखने के लिए मूविंग एवरेज का उपयोग करके आप बाजार के रुझान और रिवर्सल के बारे में एक व्यापक निष्कर्ष तक पहुंच सकते हैं।

– यदि आप 120 दिनों की अवधि के लिए पीवीआई और एनवीआई के बीच के अंतर का विश्लेषण करते हैं, और पाते हैं कि एनवीआई में इसी वृद्धि के साथ पीवीआई में कमी आई है, तो यह एक बुलिश (तेज़ी) के चरण का संकेत देता है – बढ़ते बाजार के साथ। दूसरी ओर, इसके विपरीत स्टॉक वैल्यू में कमी के साथ, अच्छी तरह से एक बेयरिश (मंदी) के बाजार का सुझाव दे सकता है। दूसरे शब्दों में एक नकारात्मक पीवीआई एक बुलिश (तेज़ी) से बाजार के साथ जुड़ा हो सकता है, जबकि एक सकारात्मक पीवीआई आमतौर पर एक बेयरिश (मंदी) के बाजार में देखा जाता है।

– विभिन्न बाजार चरणों और पीवीआई के बीच संबंध को समझना भी महत्वपूर्ण है। बाजार एक्सपर्ट्स के अनुसार, जब भी बाजार में अशांति होती है, तो पीवीआई या नॉट-सो-स्मार्ट मनी में गिरावट आती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि कीमतों में गिरावट के कारण लोग आमतौर पर अपने स्टॉक्स को बेच देंगे। इसके अलावा, बाजार में उतार-चढ़ाव के मामले में – जब स्टॉक बाजार में मुख्य रूप से निवेशक भावना के कारण सुधार होता है, न कि आर्थिक संकेतकों में वास्तविक वृद्धि के कारण – पीवीआई में वृद्धि होगी।

– हालांकि, आपको यह याद रखना चाहिए कि पॉजिटिव वॉल्यूम इंडेक्स बेयरिश (मंदी) के बाजार के साथ आमतौर पर पहचाने जाते हैं, यह मूल्य दिशा के साथ मिलकर चलता है। तो यह कभी भी विरोधाभासी संकेतक (निवेशक भावना के खिलाफ एक संकेत) नहीं है।

निष्कर्ष:

इस प्रकार, पीवीआई एक संचय सूचकांक है, जो ट्रेडिंग की वॉल्यूम में बदलाव पर विचार करता है, यह पता लगाने के लिए कि कब अनजान निवेशक या नॉट-सो-स्मार्ट-मनी स्टॉक एक्सचेंजों में सक्रिय है। इसका उपयोग आमतौर पर सही निवेश के अवसरों पर एनवीआई के साथ मिलकर किया जाता है। पॉजिटिव वॉल्यूम इंडेक्स की तरह, तकनीकी विश्लेषण का उपयोग करने के साथ-साथ, आपको निवेश के निर्णय लेने से पहले अपने निवेश लक्ष्यों, जोखिम की भूख और मौजूदा वित्तीय स्थिति जैसे अन्य प्रमुख कारकों पर विचार करना चाहिए। इसके साथ-साथ, आपको हमेशा एक विश्वसनीय और भरोसेमंद वित्तीय भागीदार चुनना होगा, जो आपको कई स्टॉक एक्सचेंजों के लिए सिंगल-पॉइंट एक्सेस के साथ अत्याधुनिक ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म प्रदान कर सकता है। 2-इन-1 डीमैट-कम-ट्रेडिंग खाते जैसी सुविधाओं के लिए, एक्सपर्ट्स से विस्तृत रिपोर्ट और वास्तविक समय स्टॉक अपडेट के लिए देखें।