पूंजी बाजार दैनिक आधार पर हजारों कारोबारियोंऔर निवेशकों की भागीदारी देखते हैं। सभी प्रतिभागियों का प्राथमिक उद्देश्य लाभ कमाना होता है। शेयर बाजारों में कारोबार करने के लिए विभिन्न तकनीकि और रणनीतियां हैं। हालांकि, एक कारोबारिक रणनीति केवल तभी लागू होती है जब परिसंपत्ति की कीमत एक अनुकूल संचलन दिखाती है। पूंजी बाजारों से लाभ प्राप्त करने की एक असामान्य लेकिन सरल तकनीक है।

आर्बिट्रेज क्या है?

यह समझने के लिए कि आर्बिट्रेज कैसे काम करती है,आर्बिट्रेज क्या है इसकी स्पष्ट धारणा होना अत्यंत आवश्यक है। आर्बिट्रेज को विभिन्न बाजारों में एक ही परिसंपत्ति की एक साथ खरीद और बिक्री के रूप में परिभाषित किया जा सकता है,ताकि दोनों बाजारों में कीमत में अंतर से लाभ प्राप्त किया जा सके। हालांकि, आर्बिट्रेज का अवसर किसी भी परिसंपत्ति वर्ग में उत्पन्न हो सकता है जिसका कारोबार मानकीकृत रूप में विभिन्न बाजारों में किया जाता है, यह मुद्रा और शेयर बाजारों में अधिक आम है। आर्बिट्रेज के अवसर अक्सर अल्पकालिक होते हैं, केवल कुछ सेकंड या मिनट तक चलते हैं। लोकप्रिय आर्थिक मान्यताओं के विपरीत, बाजार पूरी तरह से कुशल नहीं हैं, जो आर्बिट्रेज के अवसरों को जन्म देता है। एक परिसंपत्ति की कीमत बाजार में मांग और आपूर्ति का परिणाम है। विभिन्न बाजारों में एक परिसंपत्ति की आपूर्ति और मांग में विसंगति के कारण, कीमत में अंतर उत्पन्न होता है, जिसका उपयोग आर्बिट्रेज कारोबार के लिए किया जा सकता है।

आर्बिट्रेज व्यापार कैसे काम करता है?

आर्बिट्रेज ट्रेडिंग विभिन्न बाजारों में एक ही परिसंपत्ति के मूल्य अंतर को भुनाने की कारोबारी की क्षमता पर निर्भर है चूंकि आर्बिट्रेज के अवसर बहुत छोटी होती हैं, इसलिए आर्बिट्रेज ट्रेडों का संचालन करने के लिए अधिकांश कारोबारी कंप्यूटर का उपयोग करते हैं। आइए हम इस उदाहरण के साथ समझें कि शेयर बाजार में आर्बिट्रेज कैसे काम करता है। आइए मान लें कि एक शेयर XYZ राष्ट्रीय स्टॉक एक्सचेंज और न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध है XYZ की कीमत NYSE पर अमेरिकी डॉलर में कोट की गई है, जबकि एनएसई पर भारतीय रुपये में कोट की गई है। NYSE पर XYZ की शेयर कीमत $4 प्रति शेयर है। एनएसई पर, शेयर की कीमत 238 रुपये है। अब, अगर USD/INR विनिमय दर 60 रुपये है, तो INR में NYSE पर XYZ की शेयर कीमत 240 रुपये होगी। इस स्थिति में, अगर USD को INR में परिवर्तित किया जाता है, उसी स्टॉक को एनएसई पर 238 रुपये में और एनवाईएसई पर 240 रुपये पर कोट किया जा रहा है।

आर्बिट्रेज के अवसर का फायदा उठाने के लिए, एक कारोबारी XYZ के शेयरों को एनएसई पर 238 रुपये प्रति शेयर खरीद लेगा और समान संख्या में शेयरों को एनवाईएसई पर 240 रुपये में बेच देगा, जिससे प्रति शेयर 2 रुपये का लाभ अर्जित होगा। आर्बिट्रेज ट्रेडों में भाग लेने के दौरान कारोबारियों को कुछ जोखिमों को ध्यान में रखना होगा। मूल्य अंतर एक अनुकूल विनिमय दर का परिणाम है, जो निरंतर प्रवाह में रहता है। विनिमय दर में कोई भी पर्याप्त परिवर्तन, जबकि कारोबार क्रियान्वित किया जा रहा है नुकसान की ओर ले जा सकते हैं। एक और महत्वपूर्ण कारक लेनदेन शुल्क है, जिसे ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है। यदि लेनदेन लागत 2 रुपये प्रति शेयर से अधिक है, तो यह मूल्य अंतर का लाभ समाप्त कर देगा।

भारत में आर्बिट्रेज कैसे काम करती है?

ऐसी कंपनियों की कमी है जो भारतीय स्टॉक एक्सचेंजों के साथसाथ विदेशी एक्सचेंजों पर सूचीबद्ध है हालांकि, भारत के दो प्रमुख एक्सचेंज हैंबीएसई और एनएसईऔर अधिकांश कंपनियां दोनों एक्सचेंजों पर सूचीबद्ध हैं, जिससे आर्बिट्रेज की क्षमता पैदा होती है। भले ही किसी विशेष शेयर की कीमत में एनएसई और बीएसई पर अंतर हो, तो भी कोई ऐसे ही बस आर्बिट्रेज कारोबार नहीं कर सकता। कारोबारियों को एक ही दिन में एक ही स्टॉक को विभिन्न एक्सचेंजों पर खरीदने और बेचने की अनुमति नहीं है। उदाहरण के लिए, यदि आप आज एनएसई पर XYZ के शेयर खरीदते हैं, तो इसे उसी दिन बीएसई पर बेचा नहीं जा सकता है। तो आर्बिट्रेज कैसे काम करता है? कोई उन शेयरों को बेच सकता है जो कि पहले से ही एक एक्सचेंज पर आपके डीपी में है और एक अलग एक्सचेंज से उतनी ही मात्रा में खरीद सकता है। उदाहरण के लिए, यदि आपके पास पहले से ही XYZ के शेयर हैं, तो आप उन्हें बीएसई पर बेच सकते हैं और इन्हें एनएसई से खरीद सकते हैं। यदि आपके पास पहले से ही स्टॉक है, तो यह विभिन्न एक्सचेंजों पर इंट्राडे कारोबार नहीं है, जिसकी अनुमति नहीं है।

निष्कर्ष

आम तौर पर आर्बिट्रेज कारोबार के लिए स्वचालित प्रणाली का उपयोग किया जाता है क्योंकि मूल्य में अंतर एक लंबे समय के लिए होल्ड नहीं होता है। हालांकि आर्बिट्रेज के अवसर को स्पॉट करना आसान है, मैन्युअल रूप से उनसे लाभ प्राप्त करना बहुत मुश्किल है।