अनिश्चितता शेयर बाजार के लिए अच्छा संकेत नहीं  है। फरवरी  माह के पूरे होने तक, सेंसेक्स के घरेलू आर्थिक मंदी और कोरोना वायरस के प्रभाव के भय के बीच इतिहास में सबसे दयनीय हालात सामने आए हैI वैश्विक तनाव ने शेयर बाजार के विभिन्न क्षेत्रों को अलग-अलग ढंग से प्रभावित किया है।

भारतीय अर्थव्यवस्था और उसके शेयर बाजार पर प्रभाव का सबसे बड़ा कारण आयात और निर्यात के लिए चीन पर अधिकतम निर्भरता रहा है। भारत ने अप्रैल-दिसंबर 2019 में, 52 अरब डॉलर की वस्तुओं का आयात तथा 13 अरब डॉलर का माल निर्यात किया और यह दोनों देशों के व्यापार में उल्लेखनीय मूल्य है।

वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए चीन में हुए लॉकडाउन के भारत में शेयर बाजार के विभिन्न क्षेत्रों पर अनेक दुष्प्रभाव सामने आए हैं। आइए, शेयर बाजार में विभिन्न क्षेत्रों पर कोरोनावायरस के प्रभाव पर नज़र डालें।

दवाइयां

भारतीय दवाई कंपनियां बड़ी संख्या में चीन से अपने उत्पादों के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण सामग्री आयात करती है। आवश्यक रसायन, इंटरमीडिएट और सक्रिय दवा सामग्री, आवश्यक शुरुआती सामग्री चीन से ही आती हैं। चीन में कोरोनावायरस से आतंकित प्रांत हुबेई,  सक्रिय दवा सामग्री के निर्माण के सबसे बड़े केंद्रों में से एक है। चीन के लॉकडाउन का तात्पर्य है कि कोई विकल्प न मिलने पर, दवा कंपनियों के 67% तक कच्चे माल की सूची अपूर्ण रह सकती हैIयह भारत में दवा उत्पादों की आपूर्ति को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है, जिससे कीमतों में वृद्धि होगी और शेयर बाजार में परेशानी का मुद्दा खड़ा होगाI 

उपभोग्य सामग्री

एयर कंडीशनर और रेफ्रिजरेटर जैसे सामानों को कंप्रेसर जैसे आवश्यक घटकों की आवश्यकता होती है जो मुख्य रूप से चीन से खरीदे जाते हैं। चीन में कंप्रेसर विनिर्माण इकाइयों को बंद होने से, भारत में इन घटकों की आपूर्ति पर प्रभाव पड़ेगा तथा इन घरेलू सामानों के अंतिम उत्पादन में रूकावट आएगीI इन वस्तुओं को बेचने वाली कंपनियां नुकसान का सामना कर सकती हैं और शेयर बाजार में हार सकती हैं।

सूचना प्रौद्योगिकी

एयरलाइंस और होटल जैसी यात्रा और परिवहन संस्थाएं, आईटी सेवा कंपनियों के कुछ बड़े ग्राहक हैं। चूंकि वैश्विक यात्रा प्रतिबंधित की जा रही है और चेतावनी दी जा रही है तो  इस क्षेत्र में भी भारी गिरावट होने की संभावना है।

मोटर वाहन उद्योग

भारत चीन से आवश्यक मोटर वाहन घटकों का 10 -30% आयात करता है। अगर चीन अगले कुछ हफ्तों में निर्यात फिर से शुरू नहीं कर पाता, तो कुछ ऑटोमोबाइल कंपनियां की पूरी तरह से बंद हो सकती है। इसे ऑटोमोबाइल उद्योग में वर्तमान मंदी और निवेशक की चिंता के रूप में देखा जा सकता है।

कृषि-रसायन

अभी तक रसायनों और इंटरमीडिएटो का आयात चीन से दूसरा महत्वपूर्ण आयात है। भारत में एग्रोकेमिकल उपयोगकर्ता आमतौर पर लगभग 60 दिनों के कच्चे माल का स्टॉक करते हैं। अगर अगले 4-5 हफ्तों में चीन से आपूर्ति नहीं की जाती है, तो भारतीय कृषि रसायन उद्योग खुद को उत्पादन में कमी की अवस्था में खड़ा पाएगाIशुक्र है कि भारतीय कृषि संबंधी स्टेकहोल्डर्स ने कठोर पर्यावरणीय नीतियाँ बनाने के कारण पिछले कुछ वर्षों में चीन के निर्यात पर निर्भरता कम कर दी थीI इससे निश्चितत: चीन पर निर्भरता में कमी आयी, लेकिन शीघ्र ही आपूर्ति शुरू नही होने पर, इसका क्षेत्र पर पर्याप्त विचारणीय प्रभाव पड़ सकता हैI    

तेल और गैस

न्यूनतम मांग के कारण डाउनस्ट्रीम कंपनियों, रिफाइनिंग, प्रसंस्करण तथा तेल और गैस को शुद्ध करने में कार्यरत कंपनियों को भारी नुकसान होगाIन्यूनतम मांग का कारण, यात्रा क्षेत्र में मांग की कमी है, जिससे पूर्व-पश्चिम यातायात और गतिशीलता में कमी आ रही है।

वस्त्र

चीन वैश्विक परिधान के 40% निर्यात पर मजबूत पकड़ बनाए हुए हैI वायरस फैलने के डर से चीन के कई वस्त्र संयंत्रों के बंद होने के बाद से, निर्यात में बेहद कमी आई है। घरेलू भारतीय वस्त्र कंपनियां, आपूर्ति श्रृंखला में इस व्यवधान का लाभ उठा रही हैं और स्टॉक कीमतों के जरिए यह बढ़ोत्तरी का अवसर है।

निश्चित भारतीय सूचीबद्ध कंपनियों के लिए लाभकारी पहलू 

चीन से निर्यात को कम करके, ‘मेक इन इंडिया’ लेबल वाली सूचीबद्ध कंपनियों को लाभ की ओर अग्रसर होंगी। चीनी ब्रांडों या चीन पर निर्भर ब्रांडों द्वारा उत्पादन की मांग को पूरा करने की जगह, भारत में स्थित कच्चे माल और विनिर्माण इकाइयों पर निर्भरता, उत्पादों की मांग पूरी करने में मदद करेगीI चीन के प्रतिबंधित निर्यात से भारतीय बाजार में अपेक्षाकृत सस्ती चीनी उत्पादों, विशेष रूप से उपभोक्ता वस्तुओं की भरमार में कमी आएगी, जिससे घरेलू उत्पादों को लाभ प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।

भारतीय रासायनिक निर्माता संभावित रूप से भारतीय बाजारों में चीनी रासायनिक निर्माताओं द्वारा छोड़ी गई कमी पर पूरा कर सकते हैं। हालांकि भारतीय उत्पादक कमी को पूरा करने के लिए पर्याप्त रूप से सक्षम नही हो सकते, फिर भी यह एक शुरुआत होगी, और बाजार खरीददार इन कंपनियों में निवेश करना चाहेंगे।

पेंट और प्लास्टिक उद्योग में तेल आवश्यक प्राथमिक कच्चा माल होने की वजह से,  कच्चे तेल की कीमतों में कमी पेंट और प्लास्टिक उद्योग में उन्नति का कदम होगाIइस प्रकार, पेंट या प्लास्टिक बनाने वाली सूचीबद्ध कंपनियों में अधिक निवेशकों के जुड़ने और बेहतर स्टॉक बाजार बनने की संभावना बनी हुई है।

अंत में 

ऐसे अनिश्चित हालातों में, शेयर बाजार के खरीददारों और विक्रेताओं का डरे-सहमे होना सहज ही है। भारतीय शेयर बाजार मजबूत और अवसरवादी है और पिछले एक दशक में इबोला और स्वाइन फ्लू के प्रकोप के दौरान इसी तरह के मामलों के बाद शेयर बाज़ार ने खुद को बेहतर ढंग से खड़ा किया है।  हमेशा की तरह, कुछ क्षेत्रों को कोरोनावायरस के प्रभाव से आर्थिक रूप से लाभ होगा; कुछ नुकसान की कगार पर खड़े होंगे।

भारतीय शेयर बाजार के विभिन्न क्षेत्रों के संभावित उतार-चढ़ाव को समझने के लिए कोरोनावायरस के इलाज और उपचार से संबंधित आने वाले विश्वसनीय समाचारों तथा वैश्विक बाजार सूचकांकों की निगरानी करना महत्वपूर्ण है।