जब कोई व्यक्ति किसी फ्यूचर्स या विकल्प को खरीद या बेच रहा है, तो उनका ब्रोकर मार्जिन के रूप में जाना जाने वाला कुछ कर वसूलता है। कॉन्ट्रैक्ट्स पर इस मार्जिन का उद्देश्य, कीमतों के प्रतिकूल उत्तर-चढ़ाव के संभावित जोखिम के खिलाफ एक कवर प्रदान करना है। आम तौर पर, दो व्यापक प्रकार के मार्जिन होते हैं: स्पैन मार्जिन और एक्सपोजर मार्जिन। 

स्पैन और एक्सपोजर मार्जिन दोनों जोखिम विश्लेषण के साधन हैं। जबकि स्पैन मार्जिन एक्सचेंजों के जनादेश के अनुसार, फ्यूचर और विकल्प लेखन पदों के लिए न्यूनतम अपेक्षित अवरुद्ध है, एक्सपोजर मार्जिन किसी भी संभावित एटीएम नुकसान के लिए स्पैन कुशन के बाद अवरुद्ध किये जाते हैं। इस लेख में, हम पता लगाएंगे कि स्पैन और एक्सपोजर मार्जिन क्या है, और उनमें से प्रत्येक के कार्यों का विवरण देखेंगे । 

स्पैन मार्जिन 

स्पैन, या स्टैण्डर्ड पोर्टफ़ोलियो एनालिसिस ऑफ रिस्क, एक ऐसा तरीका है जो अपना नाम, स्पैन की गणना करने वाले एक सॉफ्टवेयर से प्राप्त करता है और पोर्टफोलियो जोखिम को मापने में इसका इस्तेमाल किया जाता है। भारतीय शेयर बाजारों में यह आमतौर पर वी ए आर मार्जिन के रूप में भी जाना जाता है, बाजार में ट्रेड शुरू करने के लिए स्पैन मार्जिन, न्यूनतम आवश्यक मार्जिन  है। इसकी गणना एफ एंड ओ रणनीतियों के पोर्टफोलियो जोखिम के विश्लेषण के मानकीकृत रूप से की जाती है। आप आगे बढ़कर आपना ऑर्डर देने से पहले, कुछ और तरीकों का उपयोग करके अपने मार्जिन की कई जगहों से गणना कर सकते हैं । आमतौर पर, स्पैन मार्जिन उन लोगों द्वारा काम में लिया जाता है जो एफ एंड ओ ट्रेडर्स हैं और जिनके पास पहले से ही किसी भी संभावित नुकसान को कवर करने के लिए उनके मार्जिन से पर्याप्त कवर है। 

जिस तरह से स्पैन मार्जिन काम करता है, पोर्टफोलियो में हर स्थिति के लिए, सिस्टम द्वारा सबसे खराब इंट्राडे उत्तार-चढ़ाव की संभावना के लिए मार्जिन निर्धारित किया जाता है। यह जोखिम कारकों की एक सारणी की गणना के माध्यम से प्राप्त किया जाता है, जो कई सारी परिस्थितियों में किसी कॉन्ट्रैक्ट के संभावित लाभ और नुकसान के लिए ज़िम्मेदार कारणों का पता लगाते हैं। उपर्युक्त स्थितियों में,अस्थिरता, मूल्य में परिवर्तन अथवा  समय सीमा का कम हो जाना शामिल है। 

प्रतिभूति के साथ जोखिम की प्रकृति के आधार पर स्पैन मार्जिन हर प्रतिभूति के लिए भिन्न होता है। उदाहरण के लिए, एक एकल स्टॉक के लिए स्पैन मार्जिन की आवश्यकता, इंडेक्स से अधिक पोर्टफोलियो के जोखिम के कारण इंडेक्स की आवश्यकता से अधिक होगी। इसके अलावा, एक सामान्य प्रचलित नियम है कि अस्थिरता स्पैन को कम करती है और यदि अस्थिरता अधिक होती है, तो स्पैन की आवश्यकता भी उतनी ही अधिक होती है। 

स्पैन मार्जिन आवश्यकताओं की गणना करने में मदद करने के लिए, कंपनियों द्वारा कई कैलकुलेटर उपकरण बनाए गए हैं, लेकिन स्पैन मार्जिन एक सा ही रहता है चाहे ट्रेड की प्रकृति इंट्राडे हो या ओवरनाइट। अक्सर, दलाल जोखिम कारक कम होने के कारण प्रोत्साहन के रूप में कम अग्रिम शुल्क की पेशकश करते हैं। 

एक्सपोजर मार्जिन

एक्सपोजर मार्जिन, स्पैन मार्जिन के और ऊपर चार्ज किया जाता है, और यह आमतौर पर ब्रोकर के निर्णय के अनुसार किया जाता है। इसके अलावा एक यह अतिरिक्त मार्जिन के रूप में जाना जाता है, जो संभावित रूप से बाजार में डावांडोल उत्तार-चढ़ाव के कारण उत्पन्न हो सकने वाली ब्रोकर की देनदारी  के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करने के लिए एकत्र किया जाता है। स्पैन और एक्सपोजर मार्जिन को समझने का एक तरीका यह भी है कि स्पैन मार्जिन जोखिम और अस्थिरता कारकों का आकलन करने से प्राप्त की गयी प्रारंभिक गणना है। दूसरी तरफ, एक्सपोजर मार्जिन, मार्जिन वैल्यू पर एक ऐड ओन के बराबर है जो एक्सपोजर पर निर्भर है। जबकि स्पैन मार्जिन 

एक्सपोजर मार्जिन की गणना करते समय, अंतर्निहित नियम यह है कि सूचकांक फ्यूचर के कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए मार्जिन कॉन्ट्रैक्ट  के कुल मूल्य के 3% तक सीमित है। उदाहरण के लिए, यदि कोई निफ़्टी फ्यूचर का कॉन्ट्रैक्ट  1,000,000 मूल्य का है तो एक्सपोजर मार्जिन, मूल्य का 3%, या 30,000 होगा। 

फ्यूचर ट्रेड्स शुरू करने के समय, निवेशक को प्रारंभिक मार्जिन का पालन करना होता है। सीधे शब्दों में, स्पैन और एक्सपोजर मार्जिन को संयुक्त करने के बाद यह व्युत्पन्न होता है। एक बार पुष्टि होने के बाद, पूरे मार्जिन को एक्सचेंजों द्वारा अवरुद्ध कर दिया जाता है। 2018 में लागू नए दिशा निर्देशों के अनुसार, दोनों मार्जिन को ओवरनाइट स्थिति के लिए अवरुद्ध करना होता है । इसका पालन ना कर पाने के परिणामस्वरूप दंड लगाया जाता  है । 

निष्कर्ष 

किसी भी संभावित भविष्य के नुकसान को कवर करने के लिए, विकल्पों और फ्यूचर्स  के ख़रीदार अपने खातों में पर्याप्त मार्जिन बनाए रखते हैं। स्पैन मार्जिन और एक्सपोजर मार्जिन, इस मार्जिन को बनाए रखने के लिए ख़रीदारों द्वारा उपयोग की जाने वाली दो व्यापक इकाइयां हैं। 

कुल मार्जिन की गणना करने के लिए स्पैन और एक्सपोजर मार्जिन का उपयोग किया जाता है। कुल मार्जिन स्पैन और एक्सपोजर मार्जिन का जोड़ है। जहाँ स्पैन मार्जिन फ्यूचर्स और विकल्पों के आधार पर भिन्न होता है, एक्सपोजर मार्जिन अधिकतर समान स्तर पर रहने की ही संभावना होती है। हालांकि, ब्रोकर्स संभावित ग्राहकों के लिए, प्रोत्साहन के रूप में  एक्सपोजर मार्जिन ड्रॉप करने के लिए तैयार रहते हैं ।