शेयरों में व्यापार एवं निवेश करते समय, पहला कदम यह है कि वह शेयर अच्छी तरह से प्रदर्शन कर रहा है या नहीं। यह शेयर इंडेक्स के माध्यम से किया जाता है। 

एक इंडेक्स एक समय अवधि में होने वाले परिवर्तन की गणना करता है और यह मापने में सहायता करता है कि बाजार में कुछ शेयर कैसा प्रदर्शन कर रहे हैं। यह ऊपरी एवं निचले दोनों परिवर्तनों को मापता है जिसका अनुभव शेयरों द्वारा किया जा सकता है 

एक शेयर इंडेक्स का मान अंतर्निहित प्रतिभूतियों की कीमतों पर आधारित है। इसलिए, एक शेयर इंडेक्स अनिवार्य रूप से अंतर्निहित शेयरों के प्रदर्शन को दर्शाता है। यह समझने का सबसे आसान तरीका यह है कि यदि इंडेक्स में शेयरों का एक समूह वृद्धि की प्रवृत्ति प्रदर्शित कर रहा हैं, तो इससे शेयर इंडेक्स भी बढ़ेगा; हालाँकि, यदि निवेशक शेयरों को बेच रहे हैं, तो इंडेक्स घाटे को दर्शाएगा।

अल्सर इंडेक्स क्या है?

अल्सर इंडेक्स एक अस्थिरता सूचक है जो व्यापारियों और विश्लेषकों को व्यापार करते समय अच्छे प्रवेश और निकास बिंदुओं को निर्धारित करने में मदद करता है। यह अवधारणा पहली बार 1989 में पेश की गई थी और इसे म्यूचुअल फंड पर ध्यान देने के उद्देश्य से डिजाइन किया गया था। यही कारण है कि इंडेक्स मुख्य रूप से गिरावट के जोखिमों पर आधारित है जो बाजार की बदलती परिस्थितियों के कारण प्रतिभूति की कीमतों में गिरावट की संभावना को व्यक्त करता है। चूँकि म्यूचुअल फंड केवल कीमतों में बढ़त के साथ धन को बढ़ाने के लिए बनाए जाते हैं, उनमें जोखिम तभी संभव है जब वह गिरावट का सामना कर रहे हो। इसलिए अल्सर इंडेक्स सूचक को निवेशकों को गिरावटों के जोखिमों का एक स्पष्ट दृश्य देने के लिए नामित किया गया था ताकि वे निवेश की इच्छा रख सके। अल्सर इंडेक्स सूचक कई लोगों द्वारा अन्य तरीकों जैसे मानक विचलन द्वारा जोखिमों की गणना, की तुलना में बेहतर माना जाता है। 

अल्सर इंडेक्स की गणना

अल्सर इंडेक्स की गणना एक विशिष्ट अवधि में प्रतिभूतियों की कीमत में गिरावट के आधार पर प्रतिभूतियों की अस्थिरता को दर्शाती है। इंडेक्स शून्य पर रहता है यदि कीमतें बंद होने पर अधिक रहती हैं। इसका तात्पर्य यह है कि गिरावट का कोई जोखिम नहीं है क्योंकि कीमतें निरंतर बढ़ रही हैं। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है, हालाँकि, इसका मतलब यह नहीं है कि इस दौरान कीमत में कोई कटौती नहीं होगी। अल्सर इंडेक्स की गणना 14 दिनों की न्यूनतम अवधि में की जाती है। 

यदि कीमतें हाल ही में एक गिरावट से आगे बढ़ जाती है तो अल्सर इंडेक्स का मान भी बढ़ जाता है और यदि कीमतें फिर से बढ़ जाती है तो इसका मान घट जाता है। इसलिए, जितना अधिक अल्सर इंडेक्स का मान होगा, एक प्रतिभूति को अपने पूर्व उच्च स्तर पर आने के लिए उतने ही अधिक समय की आवश्यकता होगी। 

सूचक की गणना तीन चरणों में की जाती है:

– गिरावट प्रतिशतता : 14 दिन की अवधि में उच्चतम अंतिम मूल्य तथा अंतिम मूल्य के अंतर को उच्चतम अंतिम मूल्य से भाग दिया जाता है तत्पश्चात इसे 100 से गुना किया जाता है। 

– वर्ग औसत: वर्ग औसत 14 दिन की अवधि के दौरान गिरावट प्रतिशतता के वर्गों के योग को 14 से विभाजित करके प्राप्त किया जाता है। 

– अंत में, वर्ग औसत का वर्गमूल अल्सर इंडेक्स कहलाता है। 

व्याख्या

अल्सर इंडेक्स पिछले उच्चतम स्तर की तुलना में गिरावट प्रतिशतता के लिए कुल राशि एवं  समय अवधि की गणना करता है। इसलिए, गिरावट जितनी अधिक होगी, उतना ही अधिक समय  यह शेयरो की क्षति-पूर्ति एवं मूल उच्च बिंदु पर लौटने के लिए लेगा, इसलिए अल्सर इंडेक्स उच्च होता है। 

अल्सर इंडेक्स के लाभ

अल्सर इंडेक्स के उपयोग का एक लाभ गिरावट का सामना कर रही प्रतिभूति पर पूरी तरह से ध्यान केंद्रित करना है। 

उदाहरण के लिए, मानक विचलन के साथ, एक शेयर जो गिरावट के जोखिम के कारण 10% तक नीचे खिसक गया था, अंतिम आंकड़ों को उसी तरीके से प्रभावित करेगा जो 10% तक ऊपर खिसकने पर करता था। हालाँकि, अल्सर इंडेक्स यह दृष्टिकोण देता है कि ऊपर की ओर का अंतर निवेशक के लिए सकारात्मक होगा जबकि नीचे की ओर का अंतर निवेशक के लिए निराशाजनक होगा। इसलिए मानक विचलन केवल विपरीत और गिरावट के जोखिमों की गणना करता है, साथ ही प्रसरण दिखाते समय अच्छे और बुरे पर जोर नहीं देता है। 

अल्सर इंडेक्स बहुत उच्च अस्थिरता वाली प्रतिभूतियों को  क्रमबद्ध करने और स्कैन करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। एक स्कैन उन शेयरों के लिए विशेष रूप से खोज करने के लिए चलाया जा सकता है जो कि वृद्धि की प्रवृति के संकेत दिखा रहे होते हैं। अंतिम स्कैन उच्च अस्थिरता दिखाने वाले किसी भी शेयरों को हटा देता है। 

अल्सर प्रदर्शन इंडेक्स का परिशिष्ट 

शार्प अनुपात एक अन्य उपकरण है जो जोखिम-समायोजित प्रतिलाभ की गणना करने के लिए उपयोग किया जाता है जिसे कुल प्रतिलाभ तथा जोखिम-मुक्त प्रतिलाभ के अंतर को मानक विचलन द्वारा विभाजित करके प्राप्त किया जाता है। हालाँकि, हमने यह स्थापित किया है कि दीर्घकालिक निवेशक मानक विचलन को अपकृष्ट पाते  है। इसलिए, अल्सर प्रदर्शन इंडेक्स बनाया गया था जो एक ही सूत्र है, हालाँकि, यह मानक विचलन के बजाय अल्सर इंडेक्स द्वारा विभाजित होता  है। यह जोखिम-समायोजित प्रतिलाभ के लिए जिम्मेदार है, इसीलिए अल्सर प्रदर्शन इंडेक्स का अधिक होना अच्छा होता है।   

निष्कर्ष

केवल गिरावट के जोखिमों पर ध्यान केंद्रित करके, अल्सर इंडेक्स प्रतिभूतियों की कीमतों में गिरावट का प्रतिनिधित्व करता है। इसका अर्थ यह है कि यह लंबी अवधि के निवेशकों और व्यापारियों के लिए पूरी तरह से अनुकूल है। जब इंडेक्स शून्य पर या उसके निकट होता है, तो इसका अर्थ है कि प्रतिभूति तेजी से उच्च अंतरों को माप रही है। जैसे ही प्रतिभूति की कीमत गिरती है, यूआई बढ़ जाती है। यह अपने आप में एक संकेतक नहीं हो सकता है, हालाँकि, यह निवेशकों को जोखिम-समायोजित प्रतिलाभ की गणना करने की अनुमति देता है और इसलिए इसमें निवेश करने के लिए सर्वोत्तम प्रतिभूतियों को ढूँढता है।