एक अवधारणा के रूप में तकनीकी विश्लेषण काफी बड़ा और व्यापक है। इसमें सूचकों, पैटर्नों  और चार्टों की एक विस्तृत श्रृंखला शामिल होती है जिसका व्यापारी लाभ उठा सकते हैं। तकनीकी संकेतकों के मेजबानों के बीच, शेफ़ ट्रेंड साइकिल (एसटीसी) सबसे व्यापक रूप से उपयोग की जाती है। शेफ़ सूचक मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डाइवर्जेंस  (एमएसीडी) सूचक के समान है, परंतु यह सटीकता के एक बढ़े हुए स्तर के साथ आता है। आइए शेफ़ ट्रेंड साइकिल सूचक का थोड़ा गहराई से अध्ययन करते है  और यह समझने की कोशिश करते हैं कि यह कैसे काम करता है। 

शेफ़ ट्रेंड साइकिल क्या है? 

1990 के दशक में इसे डौग शेफ़ नामक एक सफल विदेशी मुद्रा व्यापारी द्वारा संकल्पित और विकसित किया गया था, शेफ़ ट्रेंड साइकिल एक दोलन सूचक है। एसटीसी सूचक का उपयोग व्यापक रूप से ट्रेंडों और उनकी दिशाओं की पहचान करने के लिए किया जाता है। कभी कभी इसका उपयोग  व्यापारियों द्वारा ट्रेंड रिवर्सल की भविष्यवाणी करने के लिए किया जाता है। शेफ़ ट्रेंड साइकिल के मूवमेंट के आधार पर, खरीदने या बेचने के संकेत उत्पन्न होते हैं, जो तब व्यापारियों द्वारा या तो लंबी या छोटी स्थितियों को आरंभ करने के लिए उपयोग किए जाते है। 

शेफ़ सूचक इस अवधारणा पर कार्य करता है कि ट्रेंड चाहे तेजी या मंदी का हो, यह उच्चिष्ठ और निम्निष्ठ को दोहराने के साथ एक चक्रीय तरीके से पूर्ण होता है। इसका अनिवार्य रूप से अर्थ यह है कि हर ट्रेंड के अंत में, बाजार का मूवमेंट पलट जाता है और एक नया विपरीत ट्रेंड बनता है। उदाहरण के लिए, यदि बाजार ऊपर की ओर बढ़ रहा है, तो ऊर्ध्वमुखी ट्रेंड के अंत में, बाजार का मूवमेंट पलट जायगा और अधोमुखी ट्रेंड को अपना लेगा। और अधोमुखी ट्रेंड के अंत में, बाजार का मूवमेंट फिर से पलट जाएगा और एक ऊर्ध्वमुखी ट्रेंड को अपना लेगा। इस तरह का चक्रीय मूवमेंट निरंतर होता रहता है। 

शेफ़ सूचक कैसा दिखाई देता है?

यदि आप सफेद शेफ़ सूचक रेखा (इसे सिग्नल लाइन के नाम से भी जाना जाता है) को बारीकी से ट्रैक करते हैं, तो आप देख सकते हैं कि यह ऊपर दी गई परिसंपत्ति की कीमतों के मूवमेंट का प्रतिनिधित्व करती है। इसके अलावा, आप यह भी देख सकते हैं कि यह बार-बार उच्चिष्ठ और निम्निष्ठ की ओर जाती है, जिससे इस तथ्य की पुष्टि होती है कि ट्रेंड चक्रीय तरीके से चलते हैं। 

सूचक में ’25’ और ’75’ लेबल वाली दो अन्य क्षैतिज रेखाएँ भी शामिल हैं। ये दो रेखाएँ  क्रमशः सूचक की निचली और ऊपरी सीमाओं का प्रतिनिधित्व करती हैं। सफेद रंग का छायांकित क्षेत्र सूचक की ऊपरी और निचली सीमाओं के ऊपर या नीचे बिताए गए समय का प्रतिनिधित्व करता है। 

शेफ़ ट्रेंड साइकिल सूचक का उपयोग कैसे करें?

शेफ़ ट्रेंड साइकिल सूचक को समझना और उपयोग करना एक बहुत ही आसान है। जब भी सिग्नल लाइन शेफ़ सूचक पर ’75’ के निशान की ऊपरी सीमा से ऊपर जाती है, तो यह ‘अधिक्रीत’ क्षेत्र में परिसंपत्ति के प्रवेश का संकेत देती है। यह एक ‘बिक्री’ का संकेत उत्पन्न करता है क्योंकि बाजार स्वयं को सही कर सकता है और किसी भी समय ट्रेंड के पलटने की एक बड़ी संभावना है। इसलिए, जब व्यापारी ’75’ के निशान को पार करते हुए सिग्नल लाइन का सामना करते हैं, तो वे या तो परिसंपत्ति बेच सकते हैं और या तो बाजार से बाहर निकल सकते हैं, या वे ट्रेंड रिवर्सल से लाभ के लिए एक छोटी स्थिति की शुरुआत कर सकते हैं। 

इसी प्रकार, जब भी सिग्नल लाइन शेफ़ सूचक पर ’25’ के निशान की निचली सीमा से नीचे आती है, तो यह ‘अधिविक्रीत’ क्षेत्र में परिसंपत्ति के प्रवेश का संकेत देती है। यह एक ‘खरीद’ का सिग्नल उत्पन्न करती है क्योंकि बाजार वापस ऊपर उछल सकता है और किसी भी समय ट्रेंड के पलटने की बड़ी संभावना है। इसलिए, जब व्यापारी ’25’ के निशान को पार करते हुए सिग्नल लाइन का सामना करते है, तो वे या तो आगामी मूल्य वृद्धि से लाभ उठाने के लिए एक लंबी स्थिति शुरू कर सकते है या अपनी छोटी स्थितियों को कवर करके बाजार से बाहर निकल सकते हैं। 

जब सिग्नल लाइन दो चरम सीमाओं के बीच में पड़ती है, तो एक ट्रेंड का निर्माण होता है। परिस्थितियों के आधार पर, ट्रेंड या तो एक तेजी या मंदी का हो सकता है। व्यापारी स्थितियों की शुरुआत करने के लिए चल रहे ट्रेंड की इस जानकारी का उपयोग कर सकते हैं जो उन्हें लगता है कि वह उनके पक्ष में हो सकती है। 

निष्कर्ष

विदेशी मुद्रा बाजार में व्यापारियों द्वारा मुख्य रूप से शेफ़ ट्रेंड साइकिल सूचक का उपयोग किया जाता है। यह इस तथ्य के कारण उपयोग किया जाता है कि यह केवल भारी मात्रा और तरल बाजारों पर अच्छी तरह से कार्य करता है। हालाँकि, सूचक काफी परिवर्तनशील है और अत्यधिक तरल इक्विटी काउंटरों पर भी कार्य करने के लिए इसे अपनाया जा सकता है। ऐसा कहा जाता है कि शेफ़ ट्रेंड साइकिल अधिक्रीत और अधिविक्रीत स्तरों को इंगित कर सकते हैं। हालाँकि यह इस बात को  इंगित करने में सक्षम नहीं है कि उन स्तरों में परिसंपत्ति के कितनी देर तक बने रहने की संभावना है। इसलिए, इस तकनीकी सूचक के आधार पर ट्रेडों की शुरुआत करते समय सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।