हर निवेशक ने कभी न कभी ‘एनएसडीएल’ और ‘सीडीएसएल ‘, यह शब्द सुने ही होंगे । अपना डीमैट खाता खोलते समय, यह शब्द आम तौर पर सुनने में आते हैं। यह समझना काफी ज़रूरी है कि इन शब्दों का क्या मतलब है और एनएसडीएल और सीडीएसएल के बीच क्या अंतर है। ‘सीडीएसएल’, ‘सेंट्रल डिपोजिटरी सिक्योरिटीज लिमिटेड’ के लिए इस्तेमाल किया जाता है जबकि ‘एनएसडीएल’, ‘नेशनल सिक्योरिटीज डिपोजिटरी लिमिटेड’ के लिए इस्तेमाल होता है। सीडीएसएल और एनएसडीएल दोनों ही भारतीय सरकार द्वारा पंजीकृत डिपॉजिटरी हैं जो कई प्रकार की प्रतिभूतियों जैसे की स्टॉक्स, बॉन्ड, ईटीएफ्स की इलेक्ट्रॉनिक प्रतियों को संभालते हैं। 

एनएसडीएल और सीडीएसएल का कार्य

दोनों सीडीएसएल और एनएसडीएल डिपॉजिटरी के रूप में कार्य करते हैं। इसका मतलब है कि वे प्रशासनिक निकाय हैं जो प्रतिभूतियों, वित्तीय साधनों और निवेश के शेयरों को डिमटेरियलाइज्ड या इलेक्ट्रॉनिक रूप में रखते हैं। अपने डीपी या डिपॉजिटरी प्रतिभागी के माध्यम से, एक निवेशक दोनों में से किसी भी डिपॉजिटरी के लिए अनुरोध कर सकता है। सामान्य तौर पर, सीडीएसएल और एनएसडीएल दोनों, निवेशकों के लिए बैंकों की तरह काम करते हैं। यह पैसों की बजाय एसेट्स जैसे कि बांड्स, शेयर्स, वित्तीय साधनों वगैरह को संभालते हैं। यह एक सुविधाजनक इलेक्ट्रॉनिक रूप में इन स्टॉक्स, बांड्स या अन्य डिबेंचर्स के स्वामित्व की अनुमति देते हैं। 

वित्तीय साधनों को उनके भौतिक रूप में संभालने से कई जोखिम उत्पन्न होते हैं। दोनों एनएसडीएल और सीडीएसएल निवेशकों को धन भंडारण के लिए बैंक के समान ही अपने मार्केट अधिग्रहण के भंडारण के लिए इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम प्रदान करते हैं। इससे पहले समय में इस्तेमाल किये गए भौतिक शेयर प्रमाण पत्र की हैंडलिंग और हस्तांतरण में शामिल अधिकांश जोखिमों और असुविधाओं को खत्म करने में मदद मिली है। इसके अलावा, सीडीएसएल और एनएसडीएल की तरह की डिपॉजिटरी सेवाओं से लेनदेन की लागत को कम करने के साथ-साथ ऐसे लेनदेन के लिए प्रसंस्करण समय को कम करने में भी मदद मिली है। इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग ने निवेश की दुनिया में उछाल लाने में भी मदद की है। 

एनएसडीएल और सीडीएसएल के बीच अंतर

हालांकि यह काफी हद तक एक ही हैं, यहां एनएसडीएल और सीडीएसएल के बीच के कुछ अंतर दिए गयें हैं।

– एनएसडीएल और सीडीएसएल के बीच सबसे बड़ा अंतर यह है कि नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड,नेशनल स्टॉक एक्सचेंज में ट्रेड किए गए स्टॉक्स,  ईटीएफ्स, बांड्स इत्यादि की इलेक्ट्रॉनिक प्रतियां रखने का काम करता है। वहीँ दूसरी ओर, सेंट्रल डिपॉजिटरी सिक्योरिटीज लिमिटेड, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में ट्रेड किए गए स्टॉक्स, ईटीएफ्स, बांड्स आदि की इलेक्ट्रॉनिक प्रतियां रखने का काम करता है। इसलिए, एनएसई वह जगह है जहां नेशनल सिक्योरिटीज डिपोजिटरी लिमिटेड काम करता है जबकि बीएसई वह जगह है जहां सेंट्रल डिपोजिटरी सिक्योरिटीज लिमिटेड काम करता है।

– इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय प्रतिभूति डिपॉजिटरी लिमिटेड को 1996 में भारत के पहले इलेक्ट्रॉनिक डिपॉजिटरी के रूप में स्थापित किया गया था। यह सेंट्रल डिपॉजिटरी सिक्योरिटीज लिमिटेड से थोड़ा पुराना है जो निवेशकों के लिए भारत में स्थापित दूसरा आधिकारिक डिपॉजिटरी था। सीडीएसएल को 1999 में स्थापित किया गया था।

– एनएसडीएल को भारत के ‘नेशनल स्टॉक एक्सचेंज’ द्वारा बढ़ावा दिया जाता है। नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड को भारत के प्रमुख बैंकों और वित्तीय संस्थानों जैसे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट बैंक ऑफ इंडिया और यूनिट ट्रस्ट ऑफ इंडिया द्वारा भी बढ़ावा दिया जाता है। वहीं दूसरी ओर, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, सेंट्रल डिपॉजिटरी सिक्योरिटीज लिमिटेड को बढ़ावा देते हैं। अन्य प्रीमियर बैंक और वित्तीय संस्थान जैसे कि एचडीएफसी बैंक, बैंक ऑफ बरोडा, बैंक ऑफ इंडिया और स्टैंडर्ड चार्टर्ड जैसे बैंक भी सीडीएसएल को बढ़ावा देते हैं।

– सक्रिय उपयोगकर्ताओं के संदर्भ में, मार्च 2018 के नवीनतम डेटा से पता चलता है कि मार्च 2018 तक सेंट्रल डिपॉजिटरी सिक्योरिटीज लिमिटेड में 1.1 करोड़ सक्रिय खाते थे जबकि नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड के पास लगभग 1.5 करोड़ सक्रिय खाते थे।

एनएसडीएल या सीडीएसएल: कौन सा बेहतर है? 

जैसा कि ऊपर बताया गया है, जहां यह दोनों जहां काम करते हैं इसके अलावा सीडीएसएल और एनएसडीएल के बीच कोई ख़ास अंतर नहीं है। दोनों डिपॉजिटरी भारतीय सरकार द्वारा पंजीकृत हैं, जो भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड द्वारा विनियमित हैं, और अपने स्टॉक्स की इलेक्ट्रॉनिक प्रतियां रखने वाले निवेशकों को काफी समान सेवाएं प्रदान करते हैं। एक निवेशक के दृष्टिकोण से, ये सेवाएं आपस में बदली नहीं जा सकती हैं। इसलिए कौन सा बेहतर है, एक ऐसा सवाल है जो इस पर निर्भर करता है कि आप मुख्य रूप से कौन से स्टॉक एक्सचेंज में ट्रेडिंग करना चाहते हैं। 

असल में, यह प्रश्न कि कौन सी डिपॉजिटरी बेहतर है, कुछ हद तक व्यर्थ है। कोई भी निवेशक यह तय नहीं कर सकता है कि वह किस डिपॉजिटरी के साथ अपना डीमैट खाता खोलना चाहता है। निवेशक के ब्रोकरेज या उनके डिपॉजिटरी प्रतिभागी ही यह निर्णय लेते हैं। डिपॉजिटरी की तुलना करके कि किस डिपॉजिटरी में डीमैट खाता खोलना अधिक सुविधाजनक और किफायती होगा, डिपॉजिटरी प्रतिभागी या ब्रोकर एनएसडीएल या सीडीएसएल के बीच चुनाव करते हैं। अपने ग्राहकों की ओर से, यदि ब्रोकर के पास एक वकील द्वारा डी गयी निहित वैध शक्ति की अनुमति है तो, ब्रोकर इन डिपॉजिटरीज़ में से किसी एक से प्रतिभूतियों को क्रेडिट या डेबिट कर सकते हैं।