अनेक ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के होने के कारण ट्रेडिंग व्यापार व्यापारियों के बीच वायदा और विकल्पों के साथ एक लोकप्रिय गतिविधि बन गया है। वायदा और विकल्प (एफ एंड ओ) दो प्रकार के डेरिवेटिव हैं। कुछ विशेष अनुबंधों में इसका मूल्यों का निर्धारण अंतर्निहित सुरक्षा या संपत्ति की कीमत के अनुसार किया जाता है। यह व्यवस्था भारतीय शेयर बाजार में व्यापार के लिए उपलब्ध हैं। इसके अलावा, देश में स्टॉक एक्सचेंजों के अधिकांश कारोबार के लिए किसी भी अन्य बाजार खंड पर भी एफ एंड ओ खंड होता हैं। 

वायदा और विकल्प पार्टियों के बीच अनुबंध होता हैं। जो स्टॉक एक्सचेंज में व्यापार तंत्र के माध्यम से होता है। वायदा कारोबार में, व्यापारी किसी निश्चित तिथि या समय पर, पूर्वनिर्धारित मूल्य पर एक सूचकांक या स्टॉक अनुबंध में सुरक्षा खरीद या बेच सकता है। उदाहरण के लिए, ऐसे निवेशक जो सोने या तेल में निवेश करने में दिलचस्पी रखते हैं या उन्हें भौतिक रूप से खरीदना चाहते हैं। वे अपने डेरिवेटिव में व्यापार कर सकते हैं और पूर्व निर्धारित भविष्य की दर पर सोने या तेल व्यापार करने के लिए वायदा अनुबंध कर सकते हैं।

वायदा व्यापार में, व्यापारी या तो अनुबंध के निर्धारित समय में बाजार के उतार-चढ़ाव के आधार पर  लाभ या हानि होता है। इस लाभ या हानि की गणना अनुबंध के अंतिम तक हर दिन की जाती है, या जब तक व्यापारी अनुबंध को नहीं बेचता है। लेकिन यदि एक बार दोनों पक्ष समझौते कर लेते हैं, तो खरीदार के पास अनुबंध रद्द करने का कोई विकल्प नहीं होता है।

वही वायदा कारोबार के विपरीत, खरीदार के पास विकल्प में अनुबंध को रद्द करने का विकल्प होता है। हालांकि, खरीदार को यह लाभ देने के लिए विकल्प अनुबंध पर प्रीमियम का भुगतान करना पड़ता है। इसके अलावा, खरीदार को प्रीमियम राशि का भुगतान करना पड़ता है भले ही वे विकल्प अनुबंध रद्द करने का विकल्प चुनते हैं।

एफ एंड ओ टर्नओवर क्या है?

यह वायदा और विकल्प व्यापार पर कारोबार की कर गणना एवं इसके दाखिल के उद्देश्यों के लिए काफी महत्वपूर्ण है। इसके अलावा टैक्स रिटर्न दाखिल करते समय एफ एंड ओ ट्रेडिंग अक्सर व्यवसाय के रूप में दिखया जाता है। लेकिन यदि किसी को पहले वर्ष के कुल आय का विश्लेषण करना होगा, वह सकारात्मक या नकारात्मक मूल्य (लाभ या हानि) हो सकता है। व्यापार के लिए उपयोग की जाने वाली संपत्तियों पर मूल्यह्रास के साथ सीधे एफ एंड ओ व्यवसाय से संबंधित व्यय आय, जैसे ब्रोकर के कमीशन, ऑफिस किराया, टेलीफोन और इंटरनेट बिल इत्यादि से कटौती की जाती है। शेष राशि एफ एंड ओ ट्रेडिंग कारोबार से होती हैं।

एफ एंड ओ टर्नओवर की गणना कैसे करें?

वायदा और विकल्प कारोबार की गणना करने के लिए, निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना होता हैं:

1 कारोबार की गणना करते समय, सभी सकारात्मक और नकारात्मक मतभेदों पर विचार करना चाहिए।

2 विकल्पों को बेचते समय व्यापारी द्वारा प्राप्त प्रीमियम को शामिल करना होता हैं।

3 व्यापारी द्वारा दर्ज रिवर्स ट्रेडों के मामले में, इसके बीच के अंतर को भी कारोबार का एक हिस्सा माना जाना चाहिए।

आसान भाषा में कहे तो, एफ एंड ओ ट्रेडिंग के तहत, वायदा का कारोबार पूर्ण लाभ वाला होता हैं। जो सकारात्मक और नकारात्मक मतभेदों का योग है।

फ्यूचर्स टर्नओवर = संपूर्ण लाभ (पूरे वर्ष में विभिन्न लेनदेन पर किए गए लाभ और हानि का योग)

विकल्पों के कारोबार की गणना पूर्ण लाभ के लिए विकल्पों को बेचने पर प्राप्त प्रीमियम को जोड़कर की जा सकती है।

विकल्प टर्नओवर = विकल्पों को बेचने पर प्राप्त लाभ + प्रीमियम

एफ एंड ओ नुकसान और कर लेखा परीक्षण

लाभ या हानि पर भी, एफ एंड ओ टर्नओवर को सूचित करना होता हैं। हालांकि, एफ एंड ओ नुकसान कर लाभ के साथ आते हैं। जिसमे टैक्स ऑडिट यू/एस 44 एबी लागू होता है। जब करदाता कारोबार में नुकसान की रिपोर्ट करता है, या यदि व्यापार का कारोबार 1 करोड़ रुपये या 2 करोड़ रुपये से अधिक हो जाता है,तो इसे अनुमानित कराधान योजना द्वारा कवर किया जाता है। इसमें करदाता दावा नहीं करने का निर्णय ले सकता है, और नुकसान को आगे ले जा सकता है। इस मामले में वह कर लेखा परीक्षण से बचा जा सकता है और नुकसान को भविष्य के मुनाफे के खिलाफ सेट कर सकता है। क्योंकि आय कर देयता को कम करने के लिए एफ एंड ओ हानि गैर-सट्टा का प्रवधान है।

यदि करदाता कर लेखा परीक्षण कराने का फैसला करता है, तो उसे एक चार्टर्ड एकाउंटेंट नियुक्त करना होगा। जो निम्नलिखित चीज़े तैयार करे:

1. वित्तीय विवरण तैयार करें (लाभ और हानि — बैलेंस शीट)

2. टैक्स ऑडिट रिपोर्ट तैयार करें और फ़ाइल करें (फॉर्म 3CD)

3. आईटीआर तैयार करें और फ़ाइल करें।

निष्कर्ष

अनेक ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म की उपलब्धता के कारण एफ एंड ओ ट्रेडिंग एक आकर्षक प्रस्ताव बन गया है। एफ एंड ओ ट्रेडिंग द्वारा प्राप्त आय के बारे में कर दाखिल करते समय करदाताओं को अक्सर भ्रम में पड़ जाते है। यह समझना महत्वपूर्ण है कि आयकर उद्देश्यों के लिए जब कर परीक्षण लागू हो, तो एफ एंड ओ कारोबार की गणना कैसे करें।