बाजार अस्थिरता और वैकल्पिक कीमतें  एक-दूसरे की पूरक है। बाजार में अस्थिरता के संबंध में निवेशकों  के विचार से  परिवर्तन  से  वैकल्पिक मांग घटती या बढ़ती है।

वैकल्पिक अनुबंध वित्तीय अनुबंधों का एक रूप है जो खरीदार को एक निर्धारित मूल्य और तारीख पर अंतर्निहित संपत्ति (अनुबंध के प्रकार के आधार पर) को खरीदने या बेचने का अधिकार देता है। इसके दो प्रकार हैं – कॉल और पुट।

कॉल विकल्प — इसमें खरीदार एक विशिष्ट समय सीमा के भीतर एक पूर्व निर्धारित मूल्य पर एक परिसंपत्ति खरीद सकता है।

पुट विकल्प – इसमें अनुबंध का मालिक  भावी तारीख पर, निर्धारित कीमत पर  संपत्ति  को बेच सकता है।

हालांकि यह एक अनुबंध है, फिर भी इसमें कोई बाध्यता नहीं होती है। प्रत्येक वैकल्पिक अनुबंध की समाप्ति तिथि होती है और मालिक का अपने अधिकारों का प्रयोग न करने  पर,  यह अमान्य हो जाता है। उसका यह  निर्णय,  बाजार में अस्थिरता पर उसके दृष्टिकोण पर आधारित होता है। आंतरिक मूल्य और समय मूल्य और बेहतर व्यापार होनेपर, एक वैकल्पिक अनुबंध को  को इन-द-मनी (आईटीएम) कहा जाता हैI अन्यथा, इसमें शून्य लाभ होने की स्थिति में, मालिक व्यापार नहीं करने का फैसला कर सकता है । इसलिए, विनिमय बाज़ार में बेचीं जानी वाली अन्य परिसंपत्ति की तुलना में, वैकल्पिक अनुबंध मेंपरिसम्पत्ति को बिलकुल अलग तरीके से बेचते हैं।

एक वैकल्पिक अनुबंध की कीमत की गणना कैसे करें

वैकल्पिक अनुबंध की कीमतों को सात कारकों द्वारा निर्धारित किया जाता हैं, जिनमें से छह कारकों व्यापारी से संबंधित है। सातवां कारक अस्थिरता है। एक वैकल्पिक अनुबंध  कीरणनीति की योजना बनाने के लिए,  यह समझना जरुरी है कि अस्थिरता कारक वैकल्पिक अनुबंध की कीमतों को कैसे प्रभावित करता है।

1. विकल्पों का प्रकार — निश्चित

2. अंतर्निहित परिसंपत्ति मूल्य — ज्ञात

3. निर्धारित मूल्य — निश्चित

4. समाप्ति तिथि — ज्ञात

5. जोखिम मुक्त ब्याज दर — ज्ञात

6. अंतर्निहित परिसंपत्ति पर लाभांश — ज्ञात

7. बाजार में अस्थिरता (निहित अस्थिरता) — अज्ञात

वैकल्पिक अस्थिरता और मूल्य निर्धारण रणनीतियों के लिए ये सभी सबसे अधिक चर्चित विषय हैं।

वैकल्पिक मूल्य और बाजार में अस्थिरता

एक वैकल्पिक अनुबंध के भावी  मूल्य को तय करने में निहित अस्थिरता एक महत्वपूर्ण कारक है। जबकि अन्य सभी कारकों में जाना जाता है, निहित अस्थिरता में तरह-तरह के परिवर्तनों से वैकल्पिक कीमतें को भी बदलता जा सकता है।

निहित अस्थिरता (आईवी) क्या है? यह एक अंतर्निहित परिसंपत्ति के मूल्य परिवर्तन की संभावना का पूर्वानुमान है जो वैकल्पिक मूल्य को प्रभावित करेगा। यह वैकल्पिक अनुबंध के समय मूल्य को प्रभावित करता है।

आईवी के अलावा, पूर्वज्ञात अस्थिरता भी है, जो बाजार द्वारा प्रदर्शित वास्तविक अस्थिरता का एक सूचकांक है। हालांकि, आईवी का पूर्वज्ञात अस्थिरता की तुलना में वैकल्पिक कीमतों पर अधिक महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है क्योंकि  इसमें भावी परिवर्तन की संभावना निहित होती है। स्टॉक या परिसंपत्ति की पूर्वज्ञात और निहित अस्थिरता विरोधाभासी ट्रेंड्स को दर्शा सकती है। हालांकि, आगामी वास्तविकता को जानने के लिए इसके बारे में एक विचार प्राप्त करने के लिए दोनों की तुलना करना काफी समझदारी का काम है। ऐसा कहा जा रहा है कि, सफल व्यापार करने के लिए उच्च अस्थिरता  में एक वैकल्पिक अनुबंध की रणनीति बनाना आवश्यक हो जाता है।

वैकल्पिक अस्थिरता और मूल्य निर्धारण रणनीतियों के साथ योजना

बाजार में आई वी के साथ व्यापार करने की योजना के लिए पाँच वैकल्पिक अस्थिरता और मूल्य निर्धारण रणनीतियों को जाना जाता है। हमने उन्हें नीचे सूचीबद्ध किया है

नेकेड कॉल और पुट रणनीति

हालांकि यह लागू करने के लिए सबसे सरल रणनीति है, , फिर भी यह केवल अनुभवी व्यापारियों के लिए ही है। क्यों? इसमें जोखिम की सीमा इतनी अधिक है कि अगर आपके पूर्वानुमान गलत निकलते हैं तो असीमित नुकसान होगा।

जब अंतर्निहित परिसम्पत्ति की कीमत तेजी से बढती है, लेकिन आपको उच्च अस्थिरता की संभावना लग रही हैं, तो आप आउट-ऑफ-द-मनी पुट विकल्प बेचते हैं। यह एक नीति है कि सबसे अच्छा काम करता है जब बाजार भाव बढ़त और तटस्थता के बीच रहता है।

इसी तरह, एक व्यापारी एक नेकेड कॉल को बेच सकते हैं अगर उसे बाजार मंदी की संभावना नज़र आती  है। वह आउट-ऑफ-द-मनी कॉल विकल्प बेचता है और अंतर्निहित परिसंपत्ति की कीमत गिरने पर लाभ कमाताहै।

इसे एक उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिए कि एक वर्ष तक बढ़ने के बाद XYZ शेयरों के मूल्य में 20 प्रतिशत की गिरावट आई है। स्टॉक की वर्तमान कीमत 91 रुपये है। व्यापारी अगस्त 2020 में समाप्ति तिथि के साथ 90 रुपये कीस्ट्राइक कीमत पर शेयर खरीद सकते हैं। 53 प्रतिशत की निहित अस्थिरता के साथ पुट विकल्प की वर्तमान कीमत 11.40 रुपये है, जिसका मतलब है कि अगस्त में पुट विकल्प से लाभ प्राप्त होगा, इसकी कीमत में 12.55 रुपये या 14 प्रतिशत की कमी होनी चाहिए।

इसके विपरीत, बाजार मंदी की सम्भावना होने पर,  व्यापारी नेकेड कॉल विकल्प  बेचेगा  । यदि स्टॉक अगस्त में 90 रुपये से नीचे चला जाता है, तो व्यापारी पूरी प्रीमियम राशि रख सकता है और सौदे से लाभ कमा सकता है।

हालांकि, बस एक ही खतराहै, नेकेड कॉल या पुट विकल्प बेचने में असीमित जोखिम होता है, और यदि आपकी रणनीति ट्रेंड से मेल नहीं खाती है तो आपको भारी नुकसान हो सकता हैं। अक्सर जोखिम  से बचने के लिए, व्यापारी सौदा में शोर्ट पुट/कॉल स्थिति जोड़कर व्यपाकता लाते हैं।

शोर्ट स्ट्रैंगल और स्ट्रैडल: स्ट्रैडल सौदे में, जब बाजार में अस्थिरता अधिक होती है, तो व्यापारी कॉल और पुट विकल्प दोनों से प्रीमियम प्राप्त करने के लिए दोनों को निर्धारित मूल्य पर बेच देता है, । वह समाप्ति के समय के आसपास आईवी के कम होने की उम्मीद करता है, इस प्रकार वह दोनों विकल्पों (12.35 रुपये + Rs11.10 = 23.45 रुपये) से प्रीमियम प्राप्त कर सकता हैं।

शोर्ट स्ट्रैंगल रणनीति भी शोर्ट स्ट्रैडल के समान है। लेकिन शोर्ट स्ट्रैंगल स्थिति में कॉल और पुट विकल्पों की निर्धारित कीमतें एक नहीं होती हैं।  यह नियम इंगित करता है कि कॉल विकल्प का निर्धारित मूल्य पुल विकल्प के निर्धरित मूल्य से अधिक होता है।

उपर्युक्त उदाहरण को देखते हुए, अंतर्निहित स्टॉक का 66.55 रुपये से(निर्धारित कीमत 90 रुपये – प्रीमियम 23 रुपये प्राप्त)  ऊपर या 113.45 रुपये (रुपये 90 + रुपये 23.45) से नीचे सौदा करना लाभदायक होगा।

स्ट्रैडल की तुलना में स्ट्रैंगल में लाभ प्राप्त करने की संभावना कम होती है  , लेकिन इसमें जोखिम कम की संभावना बहुत अधिक होती है।

आयरन कोंडोर्स: यदि आपको  शोर्ट स्ट्रैंगल  का विचार पसंद आया, लेकिन इसमें शामिल जोखिम पसंद नहीं है, तो आप आयरन कोंडोर चुन सकते है। लाभ कमाने और कम जोखिम की संभावना बढ़ाने के लिए, इसमें पुट और कॉल दोनों में आउट-ऑफ़-द-मनी के साथ व्यापाक व्यापार करना शामिल होता हैं ।

निष्कर्ष

वैकल्पिक व्यापार में लाभ की संभावना निहित होती है, जब बाजार ट्रेंड बदलने की उम्मीद हो। जब आईवी अधिक है, तब बेचने की रणनीति बनाएं। उच्च अस्थिरता आपके विकल्पों की कीमतों को अधिकरखेगी और आपको उच्च लाभ प्राप्त होगा। एक निवेशक के रूप में, आपको सफल वैकल्पिक ट्रेडिंग रणनीति बनाने के लिए बाज़ार ट्रेंड के हर पक्ष पर होने वाले जोखिम पर ध्यान देने की जरूरत है।