डिमटेरियलाइज़ेशन सुरक्षा और सुविधा के साथ लचीलापन प्रदान करता है। भौतिक स्वरूप में शेयर प्रमाणपत्र  रखने से, सर्टिफिकेट फोर्जरी, महत्वपूर्ण शेयर सर्टिफिकेट की हानि और सर्टिफिकेट ट्रांसफ़र में परिणामी विलंब जैसे जोखिम होते हैं। डिमटेरियलाइज़ेशन की प्रक्रिया ग्राहकों को अपने भौतिक प्रमाणपत्रों को इलेक्ट्रॉनिक प्रारूप में परिवर्तित करने की अनुमति देकर, इन परेशानियों को समाप्त करता है।

आपको डिमटेरियलाइज़ेशन  के बारे में निम्न तथ्यों को जानने की ज़रूरत है:

  • 1. प्रतिभूतियों का विघटन।
  • 2. डिमटेरियलाइज़ेशन की प्रक्रिया।
  • 3. डिमटेरियलाइज़ेशन की जरूरत क्यों थी?
  • 4. डिमटेरियलाइज़ेशन के लाभ।

प्रतिभूतियों का डिमटेरियलाइज़ेशन क्या है?

प्रतिभूतियों का डिमटेरियलाइज़ेशन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके माध्यम से शेयर प्रमाणपत्र और अन्य दस्तावेज जैसे भौतिक प्रतिभूतियाँ इलेक्ट्रॉनिक प्रारूप में परिवर्तित की जाती हैं और एक डीमैट अकाउंट में रखी जाती हैं। मुफ़्त डीमैट अकाउंट खोलने के लिए यहाँ क्लिक करें।

एक डिपॉजिटरी इलेक्ट्रॉनिक रूप में, शेयरधारक की प्रतिभूतियों को रखने के लिए जिम्मेदार है। ये प्रतिभूतियाँ बांड, सरकारी प्रतिभूतियों और म्यूचुअल फंड इकाइयों के रूप में हो सकती हैं, जो एक पंजीकृत डिपॉजिटरी प्रतिभागी (डीपी) द्वारा  संभाली  जाती हैं। डीपी डिपॉजिटरी, एक एजेंट है जो व्यापारियों और निवेशकों को डिपॉजिटरी सेवाएँ प्रदान करता है।

वर्तमान में, सेबी के साथ पंजीकृत दो डिपॉजिटरी हैं और इन्हें भारत में संचालित करने के लिए लाइसेंस प्राप्त है:

1. एनएसडीएल (नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड)

2. सीडीएसएल (सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज (इंडिया) लिमिटेड)

डिमटेरियलाइज़ेशन की प्रक्रिया

1. डिमटेरियलाइज़ेशन की प्रक्रिया एक डीमैट अकाउंट खोलने के साथ शुरू होता है। डीमैट अकाउंट खोलने के लिए, आपको एक डिपॉजिटरी प्रतिभागी (डीपी) को शॉर्टलिस्ट करने की आवश्यकता है जो डीमैट सेवाएँ  प्रदान करता है

2. भौतिक शेयरों को इलेक्ट्रॉनिक/डीमैट फॉर्म में परिवर्तित करने के लिए, डिमटेरियलाइज़ेशन अनुरोध फॉर्म (डीआरएफ), जो डिपॉजिटरी प्रतिभागी (डीपी) के साथ उपलब्ध है, को शेयर प्रमाण पत्र के साथ भरना और जमा करना होगा। प्रत्येक शेयर प्रमाण पत्र पर, ‘डेमटेरियलाइजेशन के लिए समर्पित किया’ का उल्लेख किया जाना चाहिए

3. डीपी को इस अनुरोध को कंपनी को शेयर प्रमाण पत्र के साथसाथ  रजिस्ट्रार और ट्रांसफर एजेंटों को डिपॉजिटरी के माध्यम से संसाधित करने की आवश्यकता है

4. अनुरोध अनुमोदित हो जाने के बाद, भौतिक रूप में शेयर प्रमाणपत्र नष्ट हो जाएंगे और डिमटेरियलाइज़ेशन की पुष्टि डिपॉजिटरी को भेजी जाएगी

5. फिर डिपॉजिटरी, डीपी को शेयरों के डिमटेरियलाइज़ेशन की पुष्टि करेगा।  यह हो जाने पर , स्वामित्व शेयरों की  संख्या एक क्रेडिट निवेशक के अकाउंट में इलेक्ट्रॉनिक रूप से प्रतिबिंबित करेगा

6. डीमटेरियलाइजेशन अनुरोध को सबमिट करने के बाद इस चक्र को पूरा होने में लगभग 15 से 30 दिन लगते हैं

7. डिमटेरियलाइज़ेशन केवल एक डीमैट अकाउंट के साथ ही संभव है, इसलिए यह जानना आवश्यक है कि डिमटेरियलाइज़ेशन को समझने के लिए एक डीमैट अकाउंट कैसे खोलें

डिमटेरियलाइज़ेशन प्रतिभूतियों का क्रय:

चरण 1: एक ऐसा ब्रोकर चुनें, जो प्रतिभूतियों की खरीद की सुविधा प्रदान कर सकते हैं

चरण 2: उस ब्रोकर को भुगतान करें, जो पे-इन डे पर क्लियरिंग कॉर्पोरेशन को भुगतान की व्यवस्था करेगा

चरण 3: डिमटेरियलाइज़ेशन प्रतिभूतियों को पे-आउट डे पर ब्रोकर के क्लियरिंग अकाउंट में जमा किया जाता है

चरण 4: ब्रोकर अपने डिपॉजिटरी प्रतिभागी (डीपी) को क्लीयरिंग अकाउंट को डेबिट करने और आपके अकाउंट में क्रेडिट करने के लिए निर्देश देगा

चरण 5: डिपॉजिटरी तब डीपी को शेयरों के डिमटेरियलाइज़ेशन की पुष्टि करेगा। ऐसा हो जाने पर , शेयरों की संख्या  निवेशक के अकाउंट में एक क्रेडिट इलेक्ट्रॉनिक रूप से प्रतिबिंबित करेगा।

चरण 6: आप अपने अकाउंट में शेयर प्राप्त करेंगे। क्रेडिट प्राप्त करने के लिए, यदि आपने अकाउंट खुलवाने दौरान स्थायी निर्देश नहीं देते हैं तो आपको डीपी को ‘रसीद निर्देश’ देना होगा

डिमटेरियलाइज्ड प्रतिभूतियों को बेचना:

चरण 1: ब्रोकर चुनें और एनएसडीएल (नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड) से जुड़े स्टॉक एक्सचेंज में डिमटेरियलाइज़ेशन प्रतिभूतियों को बेचें

चरण 2: डिपॉजिटरी प्रतिभागी (डीपी) को ब्रोकर के क्लियरिंग अकाउंट को बेची गई प्रतिभूतियों की संख्या के साथ-साथ अपने अकाउंट को डेबिट करने के निर्देश दिए जाने की आवश्यकता है

चरण 3: डिलीवरी निर्देश स्लिप्स का उपयोग करके, आपको अपने डिपॉजिटरी प्रतिभागी (डीपी) को डिलीवरी निर्देश भेजने की आवश्यकता है

चरण 4: अनुरोध अनुमोदित होने के बाद, भौतिक रूप में शेयर प्रमाणपत्र नष्ट हो जाएँगे और डिमटेरियलाइज़ेशन की पुष्टि डिपॉजिटरी को भेजी जाएगी

चरण 5: दलाल पे-इन डे से पहले क्लीयरिंग कॉर्पोरेशन को डिलीवरी के लिए, अपने डीपी को निर्देश देगा

चरण 6: आप अपनी  प्रतिभूतियों की बिक्री के लिए दलाल से भुगतान प्राप्त करेंगे डिमटेरियलाइज़ेशन की आवश्यकता क्यों थी?

1. अतीत में, अक्सर शेयरों के भौतिक प्रारूप से संबंधित कागजी कार्रवाई के रखरखाव से  त्रुटियाँ और अप्रत्याशित  दुर्घटनाएँ हुईं 

2. हस्तांतरण और  लेनदेन  से संबन्धित  रिकॉर्ड और शेयर दस्तावेजों को ट्रैक करना मुश्किल था

3. इन दस्तावेजों को अद्यतन करने के प्रभारी अधिकारी शेयर कागजात की बढ़ती हुई मात्रा को संभाल नहीं  सके, जिसे  अगर न जाँचा जाय  तो यह भारतीय शेयर बाजार और संबद्ध व्यवसायों के वित्तीय आधार को अपंग कर सकता है

डिमटेरियलाइज़ेशन के लाभ

प्रतिभूतियों के डिमटेरियलाइज़ेशन के लाभों की एक विस्तृत श्रृंखला है। उनमें से कुछ इस प्रकार हैं:

1. आप आसानी से कहीं से भी अपने शेयरों और लेनदेन का प्रबंधन कर सकते हैं

2. आपकी इलेक्ट्रॉनिक प्रतिभूतियों पर स्टाम्प ड्यूटी नहीं लगाया जाता है

3. लगाए गए होल्डिंग शुल्क नाममात्र/मामूली हैं

4. चोरी, हानि, जालसाजी या क्षति जैसे भौतिक प्रतिभूतियों से जुड़े जोखिम समाप्त हो जाते हैं

5. आप एक या उससे अधिक प्रतिभूतियाँ आसानी से खरीद सकते हैं

6. कागजी कार्रवाई के उन्मूलन के कारण, किसी लेनदेन को पूरा करने में  लगने वाला समयकम हो जाता है

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डिमटेरियलाइज़ेशन का महत्व क्या है?

डिमटेरियलाइज़ेशन का अर्थ  भौतिक शेयर प्रमाणपत्रों को उनके इलेक्ट्रॉनिक रूपों में परिवर्तित करना है। यह भारतीय इक्विटी बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। इससे डिजिटलीकरण को अपनाने  में मदद मिली और इससे पूरी ट्रेडिंग प्रक्रिया सरल,  कष्टमुक्त और सुरक्षित बना दिया। इसके अलावा, यह है,

1. सुविधाजनक

2. सुरक्षित

3. कुशल

4. पेपरलेस, और

5. बहुउद्देशीय

शेयरों को डिमटेरियलाइज़ करने में कितना समय लगता है?

आमतौर पर, भौतिक शेयरों को इलेक्ट्रॉनिक प्रारूप में परिवर्तित करने में 15 से 30 दिनों के बीच का समय लागता  है।

डिपॉजिटरी क्या है?

डिपॉजिटरी एक ऐसी सुविधा है जो चीजों के सुरक्षित रक्षक के रूप में कार्य करती है; यह मुद्राएं, स्टॉक और प्रतिभूतियाँ हो सकती है। वित्तीय डिपॉजिटरी के उदाहरण, बैंक हैं। इसी तरह, एनएसडीएल और सीडीएसएल, ट्रेडिंग सिस्टम को सुविधाजनक बनाने के लिए शेयरों के संरक्षक के रूप में काम करते हैं।

डिपॉजिटरी सेवा लेने  के क्या फायदे हैं?

सिस्टम में, डिपॉजिटरी की कई भूमिकाएँ होती  हैं। ये हैं,

1. सुविधा और सुरक्षा की पेशकश

2. ट्रेडिंग प्रक्रिया को तेज़ बनाना

3. खराब डिलीवरी, देरी, नकली प्रतिभूतियों से जुड़े जोखिमों को हटाना

4. कागजी कार्रवाई को खत्म करना

5. डिमटेरियलाइज़ेशन प्रतिभूतियों के हस्तांतरण पर कोई स्टाम्प ड्यूटी नहीं  लगती है

6. कम लागत वाले लेनदेन, नामांकित सुविधा, शेयर  पर ऋण आदि जैसे फायदे प्रदान करना

डिपॉजिटरी के विभिन्न प्रकार क्या हैं?

डिपॉजिटरी के तीन मुख्य प्रकार हैं,

1. क्रेडिट यूनियन

2. बचत संस्थान

3. वाणिज्यिक बैंक 

 डीमैट अनुरोध को संसाधित करने में कितना समय लगता है?

आपकी भौतिक प्रतिभूतियों को इलेक्ट्रॉनिक प्रारूप में परिवर्तित करने में, 15-30 दिन लगेंगे।

डीमैट अकाउंट खोलने की प्रक्रिया क्या है?

आजकल, आप आसानी से एक डीमैट अकाउंट ऑनलाइन खोल सकते हैं। आप आवेदन पत्र ऑनलाइन भर सकते हैं और केवाईसी प्रक्रिया को पूरा कर सकते हैं। एक बार जब आपके दस्तावेज़ सत्यापित हो जाते हैं तो आपका अकाउंट सक्रिय(एक्टिव) हो जाएगा।

इस पर निर्भर करते हुए कि आप अपने डिपॉजिटरी प्रतिभागी के रूप में किसे चुनते हैं, आपको अपने डीमैट अकाउंट पर कुछ शुल्क देना पड़ सकता है। हालांकि, एंजेल ब्रोकिंग के साथ, आप मुफ्त में डीमैट अकाउंट खोल सकते हैं।