बैंक अकाउंट के समान ही, एक डीमैट अकाउंट से दूसरे डीमैट अकाउंट में शेयर ट्रांसफर किए जा सकते हैं। इस प्रक्रिया से शेयरों के मालिकाने पर किसी भी तरह का प्रभाव नहीं पड़ता, इससे किसी भी लेन-देन की संभावना नहीं रहती और इसके परिणामस्वरूप, शेयर ट्रांसफर करने पर आप पर कोई अतिरिक्त टैक्स भी लागू नहीं होता। लेकिन, ऐसी कुछ परिस्थितियाँ होती हैं जब किसी व्यक्ति को अपने शेयर एक डीमैट अकाउंट से दूसरे अकाउंट में ट्रांसफर करने की जरूरत होती है।

एक डीमैट अकाउंट से दूसरे डीमैट अकाउंट में शेयर ट्रांसफर करने का सबसे आम कारण होता है ब्रोकर का बदला जाना। अगर वर्तमान ब्रोकर अकाउंट होल्डर की आवश्यक्ताओं को पूरा नहीं कर पाता तो अकाउंट होल्डर को अपना ब्रोकर बदलना पड़ता है जिसके परिणामस्वरूप उसे नया डीमैट अकाउंटभी खोलना पड़ता है।  ऐसी परिस्थिति में पुराने डीमैट अकाउंट से नए डीमैट अकाउंट में शेयर ट्रांसफर करना भी जरूरी हो जाता है। जब कोई व्यक्ति जिसके कई डीमैट अकाउंट चल रहे हों, उन सब को एक कार्यकारी अकाउंट में लाना चाहे तो सभी पुराने अकाउंटों से एकल कार्यकारी अकाउंट में शेयर ट्रांसफर करना पड़ता है।

एक डीमैट अकाउंट से दूसरे डीमैट अकाउंट में शेयर कैसे ट्रांसफर किए जा सकते हैं?

एक डीमैट अकाउंट से दूसरे डीमैट अकाउंट में शेयरों का ट्रांसफर दो तरीकों से किया जा सकता है, या तो मैनुअल ट्रांसफर या ऑनलाइन ट्रांसफर द्वारा।

शयरों का मैनुअल /ऑफलाइन ट्रांसफर

एक डीमैट अकाउंट से दूसरे डीमैट अकाउंट में मैनुअल ट्रांसफर करते समय कुछ विशिष्ट जानकारियों से अवगत रहना जरूरी है। सबसे पहले, यह जानना जरूरी है कि ट्रांसफर किए जाने वाले शेयर डिपॉसिटरी सिस्टम्स में मेनटेन्ड और रखे हों।  वो दा डिपॉज़िटरी सिस्टम जो अकाउंट होल्डरों के शेयर रखने के लिए अधिकृत हैं, वे हैं नैशनल सिक्यूरिटीज़ डिपॉज़िटरी लिमिटेड (एनएसडीएल) औऱ सेंट्रल डिपॉज़िटरी सेर्विसेज़ लिमिटेड (सीडीएसएल)।

ट्रांसफर का तरीका इस बात पर निर्भर करता है कि आपका ब्रोकर किस डिपॉज़िटरी से जुड़ा हुआ है। अगर अकाउंट होल्डर के वर्तमान औऱ पिछले ब्रोकर एक ही डिपॉज़िटरी से जुड़े हैं, तो शेयर का इंट्रा-डिपॉज़िटरी ट्रांसफर (या ऑफ-मार्केट ट्रांसफर) होगा। लेकिन, अगर वर्तमान और पिछले ब्रोकर अलग अलग डिपॉज़िटरी से जुड़े हैं तो शेयरों का इंटर-डिपॉज़िटरी ट्रांसफर होगा।
How to Transfer Shares from One Demat Account to Another
जब शेयरों का इंट्रा-डिपॉज़िटरी ट्रांसफर या ऑफ-मार्केट ट्रांसफर होता है तो अकाउंट होल्डर को डिपॉज़िटरी पार्टिसिपेंट द्वारा दी गई डेबिट इन्सट्रक्शन स्लिप या डीआईएस बुकलेट इस्तेमाल करनी पड़ती है। इंट्रा-डिपॉज़िटरी ट्रांसफर के मामले में, निम्नलिखित चरणों का अनुकरण करना होगा :

चरण 1 – उन शेयरों का नाम रिकॉर्ड करें जो ट्रांसफर किए जाने हैं इसके अतिरिक्त, आईएसआईएन नम्बर भी रिकॉरड करना होगा। आईएसआईएन या इंटरनैशनल सिक्यूरिटीज़ आईडेन्टिफिकेशन नम्बर एक 12 अंक का कोड है जो फंड, ईक्विटीज़, बॉन्ड, स्टॉक, डेट, आदि जैसी सिक्यूरिटीज़ की पहचान करने के लिए आश्यक होता है। जरूरी है कि आईएसआईएन नम्बर सही तरह से दर्ज किया जाए क्योंकि सभी ट्रांसऐक्शन की प्रोसेसिंग उसी पर आधारित होगी।

चरण 2 – अगले चरण के लिए, टार्गेट क्लाइंट आईडी रिकॉर्ड करनी होगी। यह एक 16 – कैरेक्टर का कोड है जिसमें क्लाइंट की आईडी और डीपी की आईडी शामिल है।

चरण 3 – यह महत्वपूर्ण चरण है जिसमें ट्रांसफर करने के तरीके का चयन करने की जरूरत होती है। अगर ट्रांसफर का तरीका इंट्रा-डिपॉज़िटरी या ऑफ-मार्केट ट्रांसफर है, तो ” ऑफ-मार्केट ट्रांसफर” का कॉलम चयन करना होगा। अगर ट्रांसफर का तरीका इंटर-डिपॉज़िटरी है तो ” इंटर-डिपॉज़िटरी” का कॉलम चयन करना होगा। जरूरी है कि इस विकल्प को चुनते समय एहतियात बरता जाए।

डीआईएस स्लिप भरने के बाद, कुछ अंतिम चरण बाकी हैं जो पूरे किए जाने हैं:

चरण 4 – भरी हुई और हस्ताक्षर की हुई डीआईएस स्लिप अकाउंट होल्डर के वर्तमान ब्रोकर के पास जमा करनी होती है।

चरण 5 – डीआईएस के लिए प्राप्ति रिसीट ब्रोकर से प्राप्त करें। 

पुराने ब्रोकर को ट्रांसफर किए जाने वाले शेयरों को पुराने डीमैट अकाउंट से नए अकाउंट में ट्रांसफर करने में और नए ब्रोकर को उन शेयरों को नए डीमैट अकाउंट में प्राप्त करने में 3-5 कार्य दिवस लगेंगे। पुराना ब्रोकर इस पद्धति को करने के लिए कुछ चार्जेस लगाएंगे, जो कि ब्रोकर पर निर्भर करते हैं।

शयरों का ऑनलाइन ट्रांसफर

यदि शेयरों के ऑनलाइन ट्रांसफर करना हो, तो इसे सीडीएसएल का उपयोग करके आसानी से किया जा सकता है। अकाउंट होल्डर को सीडीएसएल की वेबसाइट पर जाकर खुद को रेजिस्टर करवाना होगा। रेजिस्टर करने के बाद, फॉर्म डीपी को जमा करना होगा। डीपी जब पुष्टिकरण की प्रक्रिया को पूरा कर लेता है तो अकाउंट होल्डर को भविष्य में खुद शेयर ट्रांसफर करने दिया जाता है। निम्नलिखित चरणों का अनुकरण करना होगा :

चरण 1 – सीडीएसएल वेबसाइट पर जाने के बाद, “रेजिस्टर ऑनलाइन” लिंक को चुनें। 

चरण 2 – अगला चरण है मांगे गए विवरणों को फॉर्म में भरना।

चरण 3 – फॉर्म भर जाने पर, “प्रिंट फॉर्म” का विकल्प चुनें। फॉर्म प्रिंट होने के बाद, उसे अकाउंट होल्डर के डीपी को ट्रांसफर कर दिया जाता है।

चरण 4 – डीपी द्वारा पुष्टिकरण की प्रक्रिया पूरी होने पर, अकाउंट होल्डर की ईमेल आईडी पर एक पासवर्ड भेजा जाएगा।

चरण 5 – दिए गए पासवर्ड को इस्तेमाल करके, अकाउंट होल्डर लॉग इन करके अपने शेयर ट्रांसफर करना शुरू कर सकता है।

फंड को अपने ट्रेडिंग अकाउंट में कैसे ट्रांसफर किया जाए?

ट्रेडिंग शुरू करने के लिए जो पहली चीज़ की जरूरत है वो है ट्रेडिंग अकाउंट बनाना। ऐसा इसलिए है क्योंकि ट्रेडिंग अकाउंट में फंड रहता है जो ट्रेड के लिए चल निधि का काम करता है। मुख्य रूप से तीन अलग तरीकों से राशि अकाउंट में ट्रांसफर की जा सकती है। आप पेमेंट गेटवे, एनईएफटी /आरटीजीएस सुविधा या चेक/डीडी के ज़रिए ब्रोकर को भुगतान कर सकते हैं।

  1. पेमेंट गेटवे के माध्यम से धन का तत्काल ट्रांसफर
    पेमेंट गेटवे धन ट्रांसफर करने के सबसे अधिक इस्तेमाल किए जाने वाले तरीकों में से एक है। अपने ट्रेडिंग अकाउंट में धनराशि ट्रांसफर करने के लिए कोई भी बैंक अकाउंट या डेबिट कार्ड का इस्तेमाल किया जा सकता है। इस पद्धति का एक सबसे बड़ा लाभ है कि धनराशि का ट्रांसफर तुरन्त हो जाता है, और जैसे ही अकाउंट में क्रेडिट की हुई जमा राशि दिखती है, वैसे ही ट्रेडिंग शुरू की जा सकती है। यह ध्यान रखना जरूरी है कि प्रत्येक ट्रांसफर के साथ, रु. 9 (प्लस टैक्स) का शुल्क लगता है और यदि ट्रांसफर अक्सर किए जाते हैं, तो शुल्क काफी बढ़ सकते हैं। यह भी ध्यान रखना आवश्यक है कि, सेबी विनियमों के अनुसार, क्रेडिट या चार्ज कार्ड का इस्तेमाल किसी अकाउंट में धनराशि ट्रांसफर करने के लिए नहीं किया जा सकता है, केवल डेबिट कार्ड या नेट बैंकिंग का प्रयोग राशि ट्रांसफर करने के लिए किया जा सकता है।
  2. एनईएफटी/आरटीजीएस/आईएमपीएस के माध्यम से फंड जमा करना
    फंड ट्रांसफर करने के सबसे प्रचलित तरीकों में से एक है नैशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर (एनईएफटी)। आमतौर पर एक बैंक अकाउंट से दूसरे अकाउंट में धन ट्रांसफर करने में 2-3 घंटे लगते हैं। लेकिन, अगर ट्रांसफर एक ही बैंक के दो अकाउंटों के बीच होता है तो यह तत्काल हो जाता है। जब ब्रोकर के अकाउंट में राशि ट्रांसफर करनी हो, तो ब्रोकर के अकाउंट को बेनिफिशियरी के रूप में अपने अकाउंट में जोड़ना पड़ता है। पासवर्ड और ओटीपी दर्ज करने पर, राशि ट्रांसफर हो जाती है। एनईएफटी का प्रयोग कोमोडिटी अकाउंट तथा ईक्विटी ट्रेडिंग अकाउंट में राशि ट्रांसफर करने के लिए किया जा सकता है। ट्रांसफर या तो ऑनलाइन किया जा सकता है या फिर एनईएफटी चेक जमा करके किया जा सकता है। दोनों प्रक्रियाओं में एक ही समय लगता है। एनईएफटी ट्रांसफर करने में कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगता। रियल टाइम ग्रॉस सेटेलमेंट (आरटीजीएस) एनईएफटी ट्रांसफर से काफी मिलता-जुलता है। फर्क सिर्फ इतना है कि आरटीजीएस का प्रयोग केवल रु. 2 लाख से अधिक राशि ट्रांसफर करने के लिए किया जा सकता है। जहां पर एनईएफटी और आरटीजीएस जैसे ट्रांसफर केवल बैंक के कार्य घंटों के दौरान ही हो सकते हैं (सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक), आईएमपीएस ट्रांसफर किसी भी समय किया जा सकता है। आईएमपीएस ट्रांसफर तुरंत हो जाता है लेकिन इस सुविधा के लिए अतिरिक्त शुल्क देने पड़ते हैं।
  3. चेक या डिमांड ड्राफ्ट से राशि जमा करना
    केवल ऑफलाइन ट्रेडिंग अकाउंट में ही चेक जमा करके राशि ट्रांसफर की जा सकती है। ऑनलाइन ट्रेडिंग अकाउंट में जरूरी है कि पेमेंट गेटवे या एनईएफटी/आरटीजीएस/आईएमपीएस से राशि ट्रांसफर की जाए। आपको ध्यान रखना चाहिए कि ऑफलाइन ट्रांसफर के मामले में, चेक ब्रोकर के नाम में बनाया जाता है। इस प्रक्रिया में 2-3 दिन लगते हैं और चेक या डिमांड ड्राफ्ट क्रेडिट केवल तभी अनुमोदित होता है जब ब्रोकर को क्लीयरिंग से क्रेडिट प्राप्त हो जाता है। चेक पर हस्ताक्षर करते समय ध्यान रखे और सुनिश्चित करें कि ब्रोकर के अकाउंट में राशि क्रेडिट हो गई हो नहीं तो जुर्माना लग सकते हैं।

बैंक अकाउंट को डीमैट अकाउंट से कैसे जोड़ा जाए?

जब डीमैट या ट्रेडिंग अकाउंट के साथ बैंक अकाउंट को जोड़ने की बात आती है, तो यह ध्यान रखना जरूरी है कि जबकि मूल प्रक्रिया एक समान रह सकती है, कुछ विवरण हैं जो एक बैंक से दूसरे बैंक में भिन्न हो सकते हैं। एक प्राइमरी और दो सेकेन्डरी अकाउंट जोड़ना संभव है। सभी पे-आउट प्रोसेस करने के लिए प्राइमरी अकाउंट इस्तेमाल किया जाएगा। सेकेन्डरी अकाउंटों का प्रयोग पे-इन्स को प्रोसेस करने के लिए किया जा सकता है। बैंक अकाउंट को डीमैट अकाउंट से जोड़ने के लिए निम्नलिखित करने की जरूरत है :

चरण 1 – उस बैंक की वेबसाइट पर जाएं जहाँ आपका अकाउंट है। प्रक्रिया शुरू करने के लिए आवश्यक फॉर्म भरें।

चरण 2 – कुछ मामलों में, भरे हुए फॉर्म का प्रिंट आउट लेना पड़ सकता है और उसे उस बैंक के पते पर भेजना पड़ सकता है जहाँ अकाउंट हो।

चरण 3 – सेकेन्डरी अकाउंट जोड़ने के लिए, सेकेन्डरी बैंक अकाउंट के कुछ अतिरिक्त प्रमाण चाहिए होते हैं। एक कैन्सेल्ड और पर्सनलाइज़्ड चेक (चेक पर मुद्रित नाम), बैंक पासबुक स्टेटमेंट या एक सेल्फ-अटेस्टिड बैंक स्टेटमेंट (आईएफएससी कोड / एमआईसीआर नंबर सहित) सभी को प्रमाण के दस्तावेजों के रूप में जमा किया जा सकता है।