परिचय

एमसीएक्स के अनुसार, तेल के बीज और तेल से बनी वस्तुओं में निम्नलिखित प्रकार के उत्पाद शामिल हैंआरबीडी पाल्मोलिन, क्रूड पाम तेल, रिफाइंड सोया तेल, चावल की भूसी का तेल, अरंडी बीज, सोया तेल, कनोला तेल, सूरजमुखी तेल और अन्य। कुछ तेलबीज से बनी वस्तुओं के दाम हैं – आरबीडी पाल्मोलिन के लिए 630 रु./मीट्रिक टन, तिल के बीज के लिए 8030 रु./मीट्रिक टन, सरसों के बीज के लिए 430 रू./ मीट्रिक टन और अरंडी के बीज के लिए 3,338 रू./मीट्रिक टन हैं। चूँकि  कई कारणों से तेल बीज के उत्पादन में उतार चढ़ाव आए हैं, इसीलिए तेल के बीज और तेल के दाम आज इन कारकों पर और साथ ही निवेशकों की मांग निर्भर करते है ।

भारत में खाद्य तेल उत्पादन

भारत खाद्य तेलों के प्राथमिक उत्पादकों और उपभोक्ताओं में से एक है। भारत की वनस्पति तेल अर्थव्यवस्था दुनिया में सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। भारत की विविध पारिस्थितिकी तंत्र के कारण वर्षभर में  9 प्रकार के तेल बीज फसलों को उगाया जाना सम्भव हो पाता हैं, जिनमें से 7 खाद्य तेल  (मूंगफली, सरसों, सूरजमुखी, तिल, सोयाबीन, कुसुम और नाइजर) हैं। तेल के बीजों की बड़े पैमाने पर देशभर में खेती की जाती है। हाल ही में, खाद्य तेलों की खपत बढ़ गई है, और बढ़ने की संभावना है। हमारी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पाम तेल इंडोनेशिया और मलेशिया से आयात किया जाता है।

उपयोग 

सभी तेल के बीजों में ऊर्जा, प्रोटीन और फाइबर का बहुत अधिक होता है। इस कारण से, तेल के बीज अक्सर स्तनपान कराने वाली गायों के आहार में शामिल किए जाते हैं। तेल की अधिकता के कारण तेल के बीजों में ऊर्जा पाई जाती हैं। वे विटामिन, खनिज और फैटी एसिड का एक बढ़िया स्रोत हैं। तेल के बीजों से प्रोटीन, हमारे आहार में प्रोटीन की एक ख़ास खुराक शामिल करता है।  

तेल के बीजों की दुनिया भर में खेती की जाती है क्योंकि उत्पादन किए जाने वाले ये खाद्यतेल अमूल्य हैं। इन तेलबीजों से तेल का हरसम्भव इस्तेमाल चारों ओर तेजी से बढ़ता जा रहा हैं। मानव खपत और पशु चारा के लिए उपयोग होने वाली बड़ी मात्रा के अलावा, जैव डीजल उद्योग में भी उत्पादित वनस्पति तेल का अत्यधिक उपयोग किया जा रहा है।

निष्कर्ष

आपके पोर्टफोलियो में विविधता लाने के लिए तेलबीज में निवेश करना एक बेहतर उपाय है। इसमें मुद्रास्फीति की बजाय बचत भी अधिक है। मांग और आपूर्ति के सिद्धांत से ही बाजार में सभी वस्तुओं का लेनदेन होता हैं, और तेलबीज से बनी वस्तुओं की कीमतें इससे अलग नहीं हैं। प्रमुख उपभोक्ता देशों की मांग भी कीमतों को प्रभावित करने वाला एक महत्वपूर्ण कारक है। चूंकि तेल के बीज मुख्य रूप से भोजन के रूप में उपयोग किए जाते हैं, इसलिए वैश्विक आबादी बढ़ते रहने के क्रम में उनकी कीमतों में तेजी से वृद्धि होने की संभावना है। 2050 तक विश्वआबादी की संभावना 9 अरब से भी अधिक होने की है, जिसमें जीवनयापन के लिए भोजन और तेल उत्पादन में 70% तक की बढ़त की आवश्यकता होगी। इस वजह से, तेल -बीजों की कीमत आज धीरेधीरे बढ़ रही है और बढती रहने की संभावना है।