परिचय

कच्चा तेल एक प्राकृतिक, बिना रिफाइंड किया हुआ पेट्रोलियम उत्पाद है, जिसमें पृथ्वी के अंदरूनी स्तर के प्राकृतिक पूल के हाइड्रोकार्बन जमा होते हैं। यह वायुमंडलीय तापमान और दबाव के कारण एक तरल अवस्था में रहता है। कच्चा तेल अपने रंग और स्थिरता के संदर्भ में व्यापक रूप से भिन्न हो सकता हैं और अपने हाइड्रोकार्बन प्रतिशत के आधार पर काले से पीले रंग के बीच में किसी भी रंग का हो सकता है। इसे “काले सोने” का उपनाम दिया गया है। कच्चा तेल वह कच्चा माल है जिससे डीजल, गैसोलीन, जेट ईंधन और विभिन्न प्रकार के पेट्रोकेमिकल्स का उत्पादन होता है।

भारत, चीन और लैटिन अमेरिका जैसे उभरते बाजारों का कच्चे तेल की कीमत पर बड़ा गहरा प्रभाव पड़ता है क्योंकि, उन्हें अपनी अर्थव्यवस्था में उछाल लाने के लिए तेल की आवश्यकता अधिक मात्रा में होती है और इसके परिणामस्वरूप ऊर्जा की खपत में वृद्धि होना अनिवार्य है। कच्चे तेल का भण्डार सीमित है और इसे बढ़ाया नहीं जा सकता क्योंकि, अब नए भंडार की खोज और उनके निष्कर्षण के लिए पूंजी की कमी के चलते नए तेल भंडार मिलना मुश्किल हो गया है। दूसरी ओर, कच्चे तेल की मांग हर दिन बढ़ रही है। इस मांग के कारण कच्चे तेल की कीमतें बढ़ना सुनिश्चित ही है । कच्चे तेल की कीमत, तेल के विभिन्न बैरल की स्पॉट कीमतों का एक मापदंड है। वर्तमान में कच्चे तेल की कीमत, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक विकास पर बहुत गहरा  प्रभाव डालती है, क्योंकि आपूर्ति सीमित होने के बावजूद भी सभी औद्योगिक देशों में द्वारा इसकी आवश्यकता तेज़ी से बढ़ रही है।

उत्पादन

कच्चे तेल का उत्पादन थोड़ी-बहुत कंपनियों तक ही सीमित है, जो आम तौर पर व्यापार और खपत के स्थानों से बहुत दूर और अप्रसिद्ध  स्थानों में स्थित होती हैं। इसके बावजूद, कच्चे तेल में व्यापार हमेशा ज़ोरदार रहा है। लगभग 80% कच्चा तेल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़े टैंकरों में पानी के रास्ते से पहुंचाया जाता है। दुनिया के लगभग 50% तेल के भंडार मध्य पूर्व में स्थित हैं, इसके बाद अफ्रीका और उत्तरी अमेरिका हैं। ओ पी इ सी दुनिया में 40% कच्चे तेल को नियंत्रित करता है, और अंतरराष्ट्रीय तेल व्यापार के 55% को यह अनदेखा कर देता  है।

विचारणीय जोखिम कारण 

तेल के व्यापार में, विभिन्न स्टॉक धारकों और प्रतिभागियों जैसे उत्पादक, मार्केटर्स, प्रोसेसर और निर्यातकों के लिए जोखिम प्रबंधन तकनीक आवश्यक हैं। एम सी एक्स द्वारा हाल ही में प्रस्तावित; विकसित तकनीकें और रणनीतियां जैसे कि कच्चे तेल की सुविधाएं (जो जोखिम प्रबंधन के लिए बाजार आधारित साधन है) जोखिम प्रबंधन के माध्यम से दक्षता और प्रतिस्पर्धा में सुधार करने में मदद करती  हैं।

उपयोग 

ऊर्जा का सबसे महत्वपूर्ण स्रोत होने के अलावा, कच्चा  तेल; प्लास्टिक के उत्पादन के लिए एक अनिवार्य कच्चा माल है जिससे प्लास्टिक की थैलियों से लेकर दिल के वाल्व सब कुछ बनाएं जाते हैं। कच्चे तेल का उपयोग दवा और कॉस्मेटिक उद्योगों में भी किया जाता है। इसका उपयोग विमान और पेट्रोलियम उत्पादों के लिए कार्बन फाइबर बनाने के लिए भी किया जाता है। अन्य रसायनों के साथ मिश्रित करके कच्चा तेल लगभग 6,000 उत्पादों के लिए कच्चा माल है। कच्चे तेल को दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण वस्तु माना जाता है क्योंकि अन्य आवश्यक सामग्री बनाने में इसकी आवश्यकता होती है।

निष्कर्ष

कच्चा तेल निस्संदेह दुनिया में ऊर्जा के सबसे महत्वपूर्ण स्रोतों में से एक है। यह फ़रटीलाईज़र, कीटनाशक़, साबुन, और विटामिन कैप्सूल जैसी आवश्यक वस्तुओं के निर्माण के लिए अति आवश्यक है। कच्चे तेल की कीमतें राष्ट्रों के औद्योगिक और आर्थिक विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है क्योंकि, हमारे दिन-प्रतिदिन के जीवन में लगभग हर आवश्यक वस्तु के उत्पादन में कच्चे तेल की आवश्यकता होती है। भारत में कच्चे तेल की कीमत 3,802 रुपये प्रति बैरल है।