इतिहास के दौरान, सभ्यताएं कीमती पीली धातु-सोने से आकर्षित रही हैं। हर ऐतिहासिक काल में, सोने का स्वामित्व किसी व्यक्ति की आर्थिक स्थिति का एक महत्वपूर्ण संकेतक बना रहा। लेकिन सोने में निवेश की प्रकृति वर्तमान युग भारी परिवर्तन से गुजरी है। विशेष रूप से पिछले दो दशकों में, प्रौद्योगिकी का आगमन और तेजी से वैश्वीकरण निवेशक व्यवहार और अपेक्षाओं में महत्वपूर्ण बदलाव लाए हैं। जब भी निवेश निर्णय लेने की बात आती है,चाहे यह स्टॉक, प्रतिभूतियां हो, अचल संपत्ति या सोना, 1980 और 2000 के बीच पैदा हुए, सहस्राब्दी निवेशकों का एक अलग ही दृष्टिकोण है।

भारत में सोने की खपत:

विश्व स्तर पर, भारत सोने के सबसे बड़े उपभोक्ताओं में से एक है। 1990 के दशक के बाद अर्थव्यवस्था के उदारीकरण तथा क्रय शक्ति में वृद्धि के साथ मिलने के परिणामस्वरूप कीमती धातु की मांग में वृद्धि हुई। विश्व स्वर्ण परिषद (WGC) की खबरों के अनुसार, विश्व स्तर पर हर छह औंस में से एक से अधिक भाग के लिए भारतीय उपभोक्ता जिम्मेदार होते हैं। शादी की खरीद सोने के कुल उपभोक्ता खर्च के लगभग 50% का कारण है, और सोने के आभूषण निवेश के एक सुरक्षित और विश्वासपूर्ण प्रकार के रूप में पसंद किया जाता है, प्रमुख तौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में।

सहस्त्राब्दि निवेशक और सोने के निवेश:

वर्षों से,सहस्त्राब्दि निवेशकों ने भौतिक और पेपरलेस गोल्ड सहित विभिन्न प्रकार के सोने में निवेश किया है। जबकि सोने समर्थित एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) जैसे पेपरलेस गोल्ड, सोने में निवेश के लोकप्रिय तरीका बन गया है, भौतिक सोने में निवेश का चुनाव करने वाले सहस्त्राब्दि निवेशकों की संख्या में उल्लेखनीय गिरावट आई है। सहस्त्राब्दि निवेशकों द्वारा पसंद किए जाने वाले सोने के निवेश के विभिन्न रूपों के बारे में अधिक जानने के लिए,पढ़ें:

आभूषण:

यह सहस्त्राब्दि निवेशकों के लिए सोने में निवेश का पसंदीदा तरीका नहीं है, मुख्य रूप से उच्च ‘निर्माण लागत’, सुरक्षित रखने में शामिल जोखिमों और बाजार-संबंधित शून्य रिटर्न के कारण। आभूषण निवेश का स्थान होने के बजाय,शादी और अनुष्ठान प्रयोजनों के लिए खरीदा जाता है।

स्वर्ण सिक्का योजना:

सहस्त्राब्दि निवेशकों ने इन सरकारी समर्थित सोने की निवेश योजनाओं में रुचि दिखाई है, जो 20 ग्राम के सोने की बार के साथ 5 ग्राम और 10 ग्राम के सोने के सिक्कों की पेशकश करते हैं। ये सिक्के और बार बीआईएस मानकों के अनुसार हालमार्क हैं, और 24K शुद्धता और 999 की विशुद्धता के हैं। धातु और खनिज ट्रेडिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एमएमटीसी) विभिन्न दुकानों और नामित शाखाओं के माध्यम से इन सिक्कों और बार्स की बिक्री आयोजित करता है। ये किसी भी गुप्त शुल्क के बिना,एक वापसी खरीद नीति के साथ आते हैं।

स्वर्ण समर्थित एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (गोल्ड ईटीएफ):

गोल्ड ईटीएफ की कीमत भौतिक सोने के सकल संपत्ति मान(एनएवी) द्वारा निर्धारित होती है, और इस प्रकार एक पारदर्शी बेंचमार्क के लिए प्रदान होती है। सहस्राब्दी निवेशकों ने स्टॉक एक्सचेंजों में गोल्ड ईटीएफ में कारोबार के लिए एक उल्लेखनीय वरीयता दिखायी है।जब आप एक डीमैट खाता खोलते हैं, तो ईटीएफ में कारोबार करना आसान होता है। आप एक व्यवस्थित निवेश योजना (एसआईपी) शुरू करके नियमित आधार पर ईटीएफ में एक निश्चित राशि का निवेश भी कर सकते हैं। उद्योग विशेषज्ञों के मुताबिक, आपको ट्रैकिंग त्रुटि पर विचार करना चाहिए, जो गोल्ड ईटीएफ की तुलना में निवेश करने के रिटर्न के बीच अंतर है।

संप्रभु गोल्ड बॉन्ड (एसजीबी):

ये पेपर गोल्ड में निवेश का एक और रूप है, जो सहस्राब्दी निवेशकों द्वारा पसंद किया जाता है। सरकार एसजीबी की बिक्री के लिए हर दो-तीन महीनों में एक बार विंडो खोलती है। आप द्वितीयक बाजार में सूचीबद्ध बाजार मूल्य पर-जिस समय पर चाहें-पहले जारी किए गए एसजीबी भी खरीद सकते हैं। एसजीबी में 8 साल की परिपक्वता अवधि के साथ 5 साल की निश्चित लॉक-इन अवधि होती है। ये वार्षिक आधार पर 2.5% की अतिरिक्त ब्याज दर भी प्रदान करते हैं। हालांकि एसजीबी पर ब्याज घटक कराधान के अधीन है, इन बांडों से दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर मुक्त हैं।

सहस्त्राब्दि निवेशक सोने में निवेश क्यों पसंद करते हैं?

बाजार विशेषज्ञों ने पोर्टफोलियो के विविधीकरण में सोने के निवेश के महत्व को रेखांकित किया है। सोने में निवेश मुद्रास्फीति को भी हरा सकते हैं। साथ ही, किसी भी व्यापक आर्थिक अनिश्चितता या भू-राजनीतिक अशांति के दौर में भी सोना एक सुरक्षित निवेश विकल्प बना रहता है।इसे हाल की घटना में स्पष्ट रूप से देखा जाता है, जहां कोविड-19 महामारी की वजह से वैश्विक शेयर बाजार ढह गया। हालांकि, मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज ऑफ इंडिया लिमिटेड (एमसीएक्स) में गोल्ड फ्यूचर्स में तेज कारोबार के साथ सोने की कीमतें बढ़ रही हैं। उच्च मांग के कारण सोना-समर्थित ईटीएफ के प्रीमियम में भी वृद्धि हुई थी।

निष्कर्ष:

इस प्रकार, सहस्त्राब्दि निवेशकों ने सोने में निवेश के प्रति अधिक बाजार उन्मुख दृष्टिकोण अपनाया है। सोने की खरीद को धन को समृद्धि के तौर पर लेने का दृष्टिकोण भौतिक और पेपरलेस सोने दोनों में निवेश करने से फैक्टरिंग स्थिरता, लिक्विडिटी और रिटर्न की ओर स्थानांतरित हो गया है। यदि आप एनएसई और बीएसई में एमसीएक्स या गोल्ड ईटीएफ में गोल्ड फ्यूचर्स में कारोबार करना चाहते हैं, तो हमेशा केवल एक विश्वसनीय स्टॉक ब्रोकर चुनना याद रखें। यहां, आप सहज कारोबार अनुभव के लिए अत्याधुनिक ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म तक पहुंच प्राप्त कर सकते हैं। आप एन्जिल ब्रोकिंग की ओर जा सकते हैं, जो  डीमैट अकाउंट के साथ अत्याधुनिक ट्रेडिंग समाधान प्रदान करता है।